24 जुलाई, 2017
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‘इंजिनियर’ बनने की चाह में पप्पू बना ‘भिखारी’, जानिए क्या है दिलचस्प मामला !

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गया के सिद्धांत की कहानी
बिहार के गया का रहने वाला एक भिखारी हर रोज एक हजार रुपए से अधिक की कमाई करता है, दिन में जब उसकी कमाई 1200 रुपए से अधिक होती है तब वह जल्द ही घर लौट जाता है। पोलियो से पीड़ित सिद्धांत का कहना है कि हर रोज वह 1000-1200 रुपए की कमाई कर लेता है। वह अपने वर्तमान स्थिति से खुश है और न उसे भविष्य की चिंता है न ही गुजरे जमाने की। उसने बताया कि पोलियो से उसका दाहिना पैर खराब हो गया था, मां को इलाज की कोई उम्मीद न दिखी तब उसने मां को घर खर्च में मदद करने का फैसला किया और भीख मांगने लगा। अशिक्षित सिद्धांत बताता है कि वह 200 प्रति दिन के हिसाब से एक रिक्शा तय करता है, जिस पर एक लाउडस्पीकर लगा होता है। दिन में जब उसकी कमाई 1200 से अधिक हो जाती है तो फिर वह भीख मांगना बंद कर देता है और घर लौट जाता है। गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार में 25857 भिखारी हैं, जिसमें 78 पुरुष और 17 महिलाएं हैं, जिनके पास स्नातक या उच्च शिक्षा की डिग्री है। 9848 पुरुष और 12421 महिला भिखारी निरक्षर हैं।

पटना के पप्पू की कहानी
वहीं पटना में भी ऐसा मामला देखने को मिला जहाँ जीआरपी रेलवे स्टेशन पर एक ऐसा भिखारी मिला जो की कभी इंजिनियर बनने की ख्वाहिश रखता था। लेकिन पप्पू नाम के इस युवक के साथ वक़्त ने ऐसा खेल खेला की उसकी ख्वाहिश पूरी ना हो सकी और वह भिखारी बन गया। लेकिन यह जानकर आपको हैरानी होगी की इसके वाबजूद भी उसके पास करोड़ों की संपत्ति है। दरअसल, कुछ सालों पहले पटना जीआरपी की ओर से स्टेशन पर भिखारियों को हटाया जा रहा था। तभी यह मामला सामने आया था, जहां एक भिखारी के पास से पीएनबी, एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा और इलाहाबाद बैंक के एटीएम मिले।
जब इसकी जांच हुई तो पता चला कि इसमें लाखों रुपए जमा हैं। सबसे रोचक बात तो यह थी कि यह सारे बैंक अकाउंट उसी भिखारी पप्पू के थे। करीब सवा करोड़ रुपए का मालिक पप्पू, आक भी पटना जंक्शन पर अक्सर भीख मांगता दिख जाता है। पप्पू इंजीनियर बनना चाहता था। वो पढ़ने में भी ठीक था, लेकिन रेल हादसे में हाथ खोने के बाद वो भीख मांगने लगा।
ऐसा नहीं है कि यह काम उसने मजबूरी में शुरू किया। इसके पीछे भी एक रोचक कहानी है। बात कोई सात-आठ साल पहले की है। पप्पू को उसके पिता ने पढ़ाई के लिए डांट लगाई। वो इससे नाराज होकर मुंबई चला गया। कुछ दिनों तक यहां पर जमकर मस्ती की, लेकिन एक दिन वो मुंबई में ट्रेन से सफर करते वक्त गिर पड़ा।
इसमें उसका एक हाथ जख्मी होने पर इलाज के लिए स्थानीय सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसके सारे पैसे खत्म हो गए। पप्पू ने बताया कि वह मुंबई रेलवे स्टेशन पर खड़ा था, उसकी लचारी देख लोगों ने उसे भिखारी समझकर कुछ पैसे दे दिए। पहले दिन मिले पांच सौ रुपए से उसने भरपेट खाना खाया और अपने लिए कुछ नए कपड़े भी खरीद लिए।
अगले दिन फिर उसी जगह पर जाकर बैठ गया जहां उसे सात सौ रुपए मिले। फिर क्या था भीख मांगना उसका पेशा हो गया। अब दिन भर भीख मांगता और रात में लजीज भोजन करता। कुछ दिनों में ही मेरे पास खाने-पीने के बाद एक अच्छी रकम भी जमा हो गई। इसको लेकर पटना आ गया और यहां पर भी मैंने भीख मांगना जारी रखा।
पप्पू के अनुसार, पटना के कई बैंको में उसके अकाउंट हैं। इसमें एक बड़ी रकम जमा है। उसके नाम पर पटना सिटी और दीघा में जमीन भी है, जिसकी कीमत अभी 50 लाख रुपए से ज्यादा है। पप्पू ने शादी भी रचाई है और उसका लड़का पटना के एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ता है। नाम और पता पूछने पर पप्पू कुछ भी बताने को तैयार नहीं होता।

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