08, Dec, 2016
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दरभंगा : संस्‍कृत विवि के पूर्व कुलपति ब्रह्मचारी सुरेन्‍द्र का निधन!

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दरभंगा, 29 अगस्त। संस्कृत भाषा के प्रख्‍यात विद्वान एवं कामेश्‍वर सिंह दरभंगा संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय के पूर्व कुलपति ब्रह्मचारी सुरेन्‍द्र कुमार का रविवार सुबह रुबन अस्‍पताल, पटना में निधन हो गया। वे लगभग 82 वर्ष के थे।

बताते चले कि ब्रह्मचारीजी संस्‍कृत के विख्‍यात विद्वान थे जो राष्‍ट्रपति प्रशस्ति पत्र से सम्‍मानित प्रोफेसर थे। ब्रह्मचारीजी केन्‍द्रीय शिक्षा बोर्ड के भी सदस्‍य थे। 1969-71 में कॉमनवेल्‍थ स्‍कॉलरशिप कमीशन, इंग्‍लैंड द्वारा भाषा विज्ञान में पी.एच.डी. के लिए इन्‍हें स्‍कॉलरशिप प्रदान किया गया था। इनकी पुस्‍तक संस्‍कृत सिन्‍टेक्‍स एंड ग्रामर ऑफ केस एक विश्‍व प्रसिद्ध रचना है।

डॉ. कुमार का जन्‍म 27 दिसम्‍बर, 1933 को बिहार के सारण जिले के सहाजितपुर नामक गांव में हुआ था। इनकी आरंभिक शिक्षा छपरा में हुई। पटना विश्‍वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के बाद 1979 में विश्‍वविद्यालय आयोग द्वारा प्रोफेसर चुने गए और बिहार एवं भागलपुर विश्‍वविद्यालय में विभागाध्‍यक्ष रहे। 1986 से 1988 तक कामेश्‍वर सिंह दरभंगा संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय में कुलपति रहे। वे पंजाबी विश्‍वविद्यालय, पाटियाला, रांची विश्‍वविद्यालय तथा विनोबा भावे विश्‍वविद्यालय, हजारीबाग में विजिटिंग प्रोफेसर तथा एमेरिट्स फेलो रहे। वे भारत सरकार के इंडियन इंस्टिच्‍युट ऑफ एडवांस्‍ड स्‍टडिज, शिमला में 2003 से 2006 तक फेलो रहे। उन्‍हें भारत सरकार एवं राष्‍ट्रीय संस्‍कृत संस्‍थान द्वारा प्रायोजित 15वीं विश्‍व संस्‍कृत कांग्रेस, 2011 में विभिन्‍न शैक्षणिक सत्रों में बतौर अध्‍यक्ष आमंत्रित किया गया। विगत दो वर्षों में उन्‍होंने कुरुक्षेत्र विश्‍वविद्यालय में गीता पर तथा पाण्‍डुलिपियों एवं पुरापाषाण विषयों पर विभिन्‍न संस्‍थानों एवं विश्‍वविद्यालयों में राष्‍ट्रीय पाण्‍डुलिपि आयोग द्वारा संचालित कार्यशाला में व्‍याख्‍यान देते रहे।

डाॅ भैरवलाल दास के फेसबुक वाॅल से साभार

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