05, Dec, 2016
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कलम के सिपाही फरजंद को शिवनाथ ने ‘शब्दों’ से दी श्रद्धांजलि

farzand-ahmed

वरिष्ठ पत्रकार शिवनाथ झा के फेसबुक वॉल से साभार

नमन आपको फरजन्द साहेब ! अल्लाह से दुआ करता हूँ आपको जन्नत में जगह मिले

फरजंद साहेब (फरजंद अहमद) महज शरीर से “एक आदमी” और पेशा से “पत्रकार” ही नहीं थे, बल्कि सरकारी स्कूल के एक कर्मठ शिक्षक की तरह थे, जिन्हें अपने छात्रों (कनिष्ठ पत्रकारों, जिन्हें पत्रकारिता सीखने की लालसा होती थी) को पढ़ाना-सीखाना आता था। जिन्हें “शब्दों” से खेलना आता था, “वाक्यों” को ‘तहजीब’ से “परोसना” आता था और सबसे बड़ी खूबी तो यह थी कि यह सभी कार्य “मुस्कुराते” करते थे।
सत्तर के दसक से मैं उन्हें जानता हूँ जब पटना के फ़्रेज़र रोड पर आकाशवाणी के पास यू एन आई समाचार एजेंसी में लोग उन्हें “गुरुदेव” के नाम से पुकारते थे। उस ज़माने में (सन १९७५) में मैं पत्रकारिता के सबसे निचली सीढ़ी पर (कॉपी-होल्डर के रूप में) पटना से प्रकाशित इण्डियन नेशन / आर्यावर्त पात्र समूह में अपना पैर रख दिया था। कार्यालय में मेरे सभी गुरुजन जैसे दुर्गानाथ जी (दिवंगत), मिथिलेश मैत्रा (दिवंगत), केशव कुमार (दिवंगत), सीताशरण जी, परिपूर्णानंद पान्डेय (दिवंगत), डी एन झा (दिवंगत), धैर्या बाबु (दिवंगत), फरजंद साहेब के सबसे करीबी मित्रों में थे। उस ज़माने में बिहार ही नहीं, दिल्ली के नेतागण भी, इन पत्रकारों के कलम के सामने नतमस्तक रहते थे। नेतागण के घरों पर पत्रकारों का आना-जाना “नहीं के बराबर” था बल्कि “नेतागण” इनसे मिलने इनके दफ्तर आये करते थे। उस ज़माने में किसी सम्मेंलन में नेतागण के आने पर “पत्रकारों को खड़े होकर स्वागत करने की परम्परा नहीं थी”, अलबत्ता नजर-नजर में सभी एक-दूसरों का सत्कार करते थे।
फरजंद साहेब बिहार में ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारत में, विशेषकर दिल्ली में अपने शिष्यों की एक लंबी कतार खड़ा किये, जो आज भी उनके प्रति वही सम्मान रखते हैं, जो पांच दसक पूर्व था। १९९२ में जब मैं दिल्ली आया तो अक्सरहां फरजंद साहेब कनॉट प्लेस में मिलते थे, इण्डिया टुडे के दफ्तर के बाहर। मैं पैर छूकर प्रणाम करता था और वे गुरुवर की तरह आशीष देते थे और माता-पिता, परिवार का कुशल-क्षेम पूछते थे । कुछ दिन पूर्व उनसे फोन पर लखनऊ में बात हुयी। उन्होंने हमारे प्रयास को सराहा भी।
आपको नमन है फरजंद साहेब। आपके तरह का पत्रकार-शिक्षक-लेखक शायद अभी और आने वाले समय में जन्म नहीं लेंगे। अल्लाह से दुआ करता हूँ आपको जन्नत में जगह मिले। (​यह तस्वीर भवान सिंह साहेब की है जिसमे फरजंद साहेब (कोट-पैंट में बैठे हुए) और प्रभा दत्त (लेटी हुईं) एक कहानी के सिलसिले में बिहार गए थे संभवतः यह तस्वीर नालंदा के कैमूर पहाड़ी क्षेत्र का है)

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ऐक विचार साझा हुआ “कलम के सिपाही फरजंद को शिवनाथ ने ‘शब्दों’ से दी श्रद्धांजलि” पर

  1. शिवनाथ झा ​ October 2, 2016

    ​आभार आपका

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