08, Dec, 2016
ब्रेकिंग न्यूज़

NEWS OF BIHAR

सखी फूल लोढ़े चलू फूलवरिया…एक गांव जहां दिन में दो बार फूल लोढ़ती हैं नवविवाहिता !

newsofbihar200

रोशन कुमार मैथिल की रिपोर्ट

पटना, 29 जुलाई। इन दिना बिहार के मिथिला क्षेत्र में पारम्परिक पर्व मधुश्रावणी मनाया जा रहा है। नवविवाहित महिलाएं सदा सुहागन बने रहने के लिए इन दिनों मां गौड़ी, विषहारा आदि देवी-देवताओं की पूजन अर्चन कर रही है। इनदिनों इन महिलाओं का दिनचर्या पूरा बदल सा गया है। स्नान कर पहले कथा सुनना और दिन भर उपवास रख संध्या काल सज संवर कर फूल लोढ़ना एक रूटीन सा बन गया है।

वैसे तो मिथिला के प्रत्येक गांव और शहरों में संध्या काल आपको पारम्परिक गीतों के साथ फूल लोढ़ती नव विवाहित महिलाएं मिल जाएंगी। लेकिन बिहार के दरभंगा जिला में एक ऐसा भी गांव है जहां पर एक बार नहीं बल्कि दिन में दो बार फूल लोढ़ने केे महिलाएं निकलती है। संध्याकाल फूल लोढ़ने के बाद नवविवाहित महिलाएं सज संवर कर सुबह-सुबह समूह बना फूल लोढ़ने निकल जाती है। कभी इस देवता के मंदिर पर तो कभी डिहबार बाबा के गहबर में।

हम बात कर रहे हैं गौड़ा बौराम प्रखंड के कन्हैई गांव की। जहां यह परम्परा आज भी जीवित है। आज भी यहां सुबह-शाम फूल लोढ़ने की परम्परा जीवित है। इस बारे में गांव की 70 वर्षीय महिला अमरीका देवी, चंद्रमा देवी, राम जानकी मंदिर की पुजारिन कहती हैं कि हम जब विवाह कर अपने ससुराल आए तोे यहां यह नियम देख चौंक गए। कारण हमारे अपने-अपने गांव में ऐसी परम्परा नहीं थी। इन लोगों के अनुसार यहां की बेटियां मात्र बासी फूल से नहीं अपितु ताजे फूल से भी गौड़ी, विषहारा, चनाई आदि देवी-देवताओं की पूजा करती है। यहां के लोगों के अनुसार मान्यता है कि ऐसा करने से बेटियों का अचल सुहाग बना रहता है। इस नियम पर नवविवाहित महिलाएं कहती हैं कि काफी समय से चली आ रही इस पुरानी परम्परा को निभाने में हमें भी अच्छा लगता है।

दूसरी ओर रामजानकी मंदिर के पुजारी उदयकांत महराजी कहते हैं कि वैसे अब पहले वाली बात नहीं रही। महिलाएं फूूल लोढ़ने सुबह निकलती अवश्य हैं
लेकिन पारम्परिक गीतों का अभाव रहता है। चिंता व्यक्त करते हुए वे कहते हैं कि अपनी सभ्यता और संस्कृति को संरक्षित करना अति आवश्यक है।

newsofbihar.com की ख़बरें अपने न्यूज़फीड में पढ़ने के लिए पेज like करें

newsofbihar

ऐक विचार साझा हुआ “सखी फूल लोढ़े चलू फूलवरिया…एक गांव जहां दिन में दो बार फूल लोढ़ती हैं नवविवाहिता !” पर

  1. सुशील कुमार झा July 30, 2016

    अपन संस्कृतिअ के हम सब मिठ्लंचल वासी मिलकअ सन्रक्षित करूउ.

अपने विचार साझा करें

आवश्यक लिखें चिह्नित:*

Powered By Indic IME