09, Dec, 2016
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EXCLUSIVE : बिहार के लिए शराबबंदी फायदा या नुकसान?

Hariwansh

नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी की नीति आज फिर से सवालों के घेरे में हैं. राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ाने का फैसला किया है. बीजेपी का आरोप है कि शराबबंदी के कारण घटी आमदनी की भरपाई के लिए ही पेट्रोल-डीजल को महंगा किया जा रहा है. वहीं नीतीश कुमार ने शराबबंदी की नीति को हर तरह से जायज बताया है.

राज्य में पेट्रोल पर 1.5 फीसदी वैट की बढ़ोत्तरी और डीजल पर एक फीसदी वैट की बढ़ोत्तरी की गई है. नतीजा प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत में 1 रूपया 3 पैसे का इजाफा, वहीं प्रति लीटर डीजल की कीमत में 75 पैसे की बढ़ोत्तरी हुई है. दाम बढ़ा पेट्रोल और डीजल का लेकिन गुस्सा नीतीश सरकार की शराबबंदी नीति पर निकला जा रहा है.

नीतीश कुमार ने 5 अप्रैल 2016 को शराबबंदी पर पूरी तरह रोक लगा दी. एक अनुमान के मुताबिक नीतीश सरकार के इस फैसले से राज्य को हर साल करीब 4500 करोड़ रूपये का घाटा हो रहा है. अब राज्य सरकार इस घाटे को पूरा करने के लिए दूसरे चीजों पर टैक्स लगा रही है .

अगस्त महीने में वैट संशोधन बिल लाकर राज्य सरकार ने तमाम उत्पादों पर 0.5 फीसदी से 1 फीसदी तक वैट की दर में बढ़ोत्तरी कर दी . इसके बाद अब नीतीश सरकार ने पेट्रोल की वैट दर को 24.5 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी कर दिया, वहीं डीजल की वैट दर 18 से बढ़ाकर 19 फीसदी कर दी. एक अनुमान के मुताबिक राज्य सरकार के इस फैसले से सरकारी खजाने को सालाना करीब 250 करोड़ का फायदा हो सकता है.

शराबबंदी को मेरी सनक कहना कोरी बकवास: नीतीश कुमार
लोग सवाल उठा रहे हैं, बीजेपी नीतीश सरकार पर निशाना साध रही है लेकिन खुद नीतीश कुमार अपने शराबबंदी के फैसले को ऐतिहासिक बता रहे हैं. नीतीश कुमार ने कहा कि इतिहास में किसी ने पूरी तरह से शराबबंदी लागू नहीं की है. शुरू में बीजेपी इस फैसले से सहमत थी. पर अब अपना रूख बदल रही है. शराबबंदी को मेरी सनक कहना कोरी बकवास है. मैं भरोसा दिलाता हूं कि बिहार में कुछ भी आधा-अधूरा नहीं होगा.

साइकिल योजना के बाद समाज पर शराबबंदी की नीति ने गहरा असर डाला: हरिवंश
इसी मुद्दे पर एबीपी न्यूज से राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश ने विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार कोई भी योजना बहुत सोच समझकर लाते हैं. वैट की बढ़ोत्तरी का शराबबंदी से कोई ताल्लुक नहीं है. शराबबंदी योजना को उन्होंने नीतीश की साइकिल योजना जैसे ही ऐतिहासिक बताया.

हरिवंश ने बताया कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी सामाजिक बदलाव का एक बड़ा कदम है. बिहार के सामंती समाज को जिन योजनाओं ने सबसे अधिक प्रभावित किया वह नीतीश कुमार की साइकिल योजना थी. बड़ी संख्या में लड़कियां स्कूल जाने लगी. पहली बार औरतों में समान कदम मिला कर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिखाई देने लगा. मैं मानता हूं कि उसी तरह समाज को नीचे से असर डालने और बदलने की क्षमता शराबबंदी की नीति में है. मैं बिल्कुल ठेठ गांव का हूं गांव जाने पर देखता था छोटी छोटी जगहों पर शाम में युवा बच्चे शराब की तरफ उन्मुख हो रहे थे. शराब पीना झगड़े-फसाद से सबसे अधिक परेशान महिलाएं थीं. ग्रास रूट चेंज जिसे आप कहते है वह आप गांव में देखेंगे. सबसे अधिक इसका असर उन्हीं महिलाओं पर दिखता है.

पहले गांव में चौक चौराहों पर झगड़े तनाव का माहौल दिखता था. खासकर शादी विवाह के मौकों पर घंटो-घंटो नृत्य करने सड़क जाम करने का दृश्य दिखाई देता था. शराबबंदी के लागू होने के पहले के विवाह और शराबबंदी लागू होने के बाद के विवाह को प्रत्यक्ष देखने वाले अनुभव कर सकते हैं कि शराब बंदी का क्या गहरा असर हुआ है. शराब पर जो हैंड टू माउथ है वह शाम को शराब की दुकान पर पूरे दिन की अपनी कमाई दे आता था. जिससे उनके बच्चे शिक्षा के लिए नहीं जा पाते थें. कमजोर वर्ग के मजदूर बच्चों की बुनियादी सुविधाओं पर उचित खर्च नहीं कर पाते थे. इस वर्ग को शराबबंदी की नीति का सबसे गहरा असर दिखाई देने लगा है. बिहार में इस कदम का सामाजिक और सांस्कृतिक असर दिखाई देगा.

अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक असर
हरिवंश ने इस सवाल के उठने पर कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि शराबबंदी से सरकार की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा, मैं मानता हूं वे लोग दूसरा महत्वपूर्ण पहलु नहीं देख रहे हैं. शायद बिहार में शराब का 8 हजार करोड़ का सालाना व्यवसाय होता था. अब यह पैसा जो शराब पर लोग खर्च करते थे अब वह खर्च शिक्षा, स्वास्थ्य अन्य उत्पादक गतिविधियां, उभोक्ता वस्तुओं पर भी इसका असर दिखेगा. शराबबंदी का दूरगामी असर इस तरह अर्थव्यवस्था पर दिखेगा.

शराबबंदी का तात्किल असर
राज्यसभा सांसद हरिवंश बताते हैं कि अब शराबबंदी का तात्कालिक असर अपराध की कमी, हत्या के मामले में 39 फीसदी कमी, डकैती में 54 फीसदी कमी, संज्ञेय अपराध में 20 फीसदी की कमी, लूट के मामले में 25 फीसदी की कमी, सड़क हादसे में 31 फीसदी की कमी आयी है. ये सभी आंकड़ें करीब दो महीने के हैं. धार्मिक जुलुसों के बहाने में कुछ लोग शराब पीकर उन्माद करते थे ये अब बहुत कम हुई हैं. महिलाओं के प्रति समाज मारपीट, घरेलु हिंसा इत्यादि में भी कमी आयी है. इनका समाज पर बहुत गहरा असर हुआ है.

शिबू सोरेन, एनटीआर इसको लेकर वादा किये थे. लेकिन कठोरता से लागू नहीं कर पाये थे. पटना के एस के मेमोरियल हॉल पिछले साल विधानसभा चुनाव में 9 जूलाई एक महिलाओं की मीटिंग में गये थे. नीतीश कुमार ने वही कहा था. नीतीश कुमार ने चुनाव जीतने के बाद सत्ता में आते ही इसे लागू कर दिया.

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साभार : एबीपी न्यूज

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