25 अप्रैल, 2017
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NOB Exclusive:बिहार का एक पति साइकिल से 9 महीने तक अपनी खोयी पत्नी ढूंढता रहा, क्या हुआ जब उसे मिली उसकी पत्नी.. पढ़िए रियल लव स्टोरी

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निखिल झा की प्रस्तुति

पटना, 16 नवम्बर। किसी को यह विश्वास नहीं था कि बिहार के तपेश्वर सिंह अपनी खोयी हुई पत्नी बबिता को ढूंढ पायेंगे। आपको बता दें की कि तपेश्वर सिंह इस वर्ष मार्च में साइकिल से पत्नी की तलाश में निकले थे। उन्होंने साइकिल पर अपनी प्रियतमा का पोस्टर लगाया और निकल पड़े उसकी तलाश में। 40 वर्षीय तपेश्वर सिंह को इस खोज में लोगों की सांत्वना तो मिली लेकिन जिसकी उसको तलाश थी उसे ढूँढना बहुत मुश्किलों भरा रहा।

तपेश्वर बिहार के रहने वाले हैं जो बेरोजगारी के इस दौर में मेरठ में जाकर बस गए और वहां नौकरी करने लगे। अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए तपेश्वर कहते हैं “बहुत खुश था। बबिता को हँसते हुए देखना, उसके नखरे उठाना और उसकी जरूरतों को पूरा करना। ज़िन्दगी खुशियों से भरी हुई थी।” बबिता और तपेश्वर की शादी तीन साल पहले हुई थी जब धर्मशाला में रहने वाले बबिता के सम्बन्धियों ने उसे घर से निकाल दिया। दोनों की ज़िन्दगी में सबकुछ ठीक चल रहा था की एकदिन अचानक बबिता गायब हो गई।

बबिता के गायब होते ही जैसे तपेश्वर के जीवन में दुखों की आंधी आ गई जो सबकुछ बहाकर ले गई। तपेश्वर बावरा हो गया। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था। जिसके कन्धों पर सिर रखकर दुनिया के सारे ग़मों को भूल जाता था उसके गुम होने के गम ने उसे झकझोर कर रख दिया। वह बबिता की तलाश में भटकने लगा। हर जगह तलाश किया। अपने रिश्तेदारों से लेकर बबिता के रिश्तेदारों तक हर जगह तलाशा उसने बबिता को लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला।

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उसको एक जानने वाले ने बताया की बबिता को मेरठ का एक दलाल बहला कर ले गया और उसे रेडलाइट एरिया में बेच दिया। तपेश्वर के पैरों के नीचे से जैसे जमीन खिसक गई। वह मेरठ और आसपास के हर रेडलाइट एरिया में गया और बबिता की तलाश करता रहा। इसी बीच उसे जानकारी मिली कि किसी दलाल ने बबिता के मानसिक हालत को देखते हुए उसे बेचने का प्रयास किया लेकिन डील फाइनल नहीं हो सका। इसकी जानकारी मिलने के बाद उसने थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाया और पुलिस ने उसे आश्वासन दिया की वो बबिता को जल्द ही खोज लेंगे। लेकिन बहुत दिनों तक प्रतीक्षा करने के बाद भी बबिता का कहीं पता नहीं चला। वो साइकिल से बबिता को ढूंढता रहा और दर दर भटकता रहा। उसके और बबिता के प्रेम के किस्से अब लोगों की जुबान से अखबारों के पन्नों पर आ गए लेकिन बबिता नहीं आई।

बीते सोमवार अचानक उसकी आँखें चमक गयी जब हरिद्वार में सड़क किनारे बैठे हुए उसे अपने सपनो की रानी दिखाई दी। एक अंग्रेजी अख़बार के पत्रकार के सवालों का जवाब देते हुए तपेश्वर ने बताया कि पहले तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। फिर मैंने अपनी आँखें मली की कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा। वो फटे-चिटे कपड़ों में थी। उसको देखकर मेरा दिल रो पड़ा। आठ महीने जिसे मैं दिन रात तलाशता रहा उसकी ऐसी हालत देखकर मेरा दिल रोने लगा। इन आठ महीनो में मैंने अपना कमाया एक एक पैसा खर्च कर दिया। जब सारी उम्मीद ख़त्म हो रही थी तो मेरी आँखों ने उसे देखा। सच कहते हैं भगवान् के घर देर है अंधेर नहीं।
बबिता जिसको उसके सम्बन्धियों ने घर से निकल दिया था उसने अंग्रेजी अख़बार के पत्रकार के सवाल का हँसते हुए जवाब देते हुए कहा की जब रिश्ता दिल का होता है तो उसे भगवान् भी अलग नहीं कर पाते।

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वहीं तपेश्वर ने बताया कि मैं जानता हूँ कि बबिता की दिमागी हालत ठीक नहीं है। और यही कारण है कि मुझे इसकी ज्यादा चिंता हो रही थी। रविवार को मुझे मेरे दोस्त ने फोन कर बताया की उसने बबिता को हरिद्वार में भीख मांगते देखा। मैं तभी हरिद्वार के लिए निकल पड़ा। पूरे दिन ढूंढने के बाद आखिर मेरे सपनो की रानी को मैंने पा लिया। अब हम घर जा रहे हैं और हम प्यार से रहेंगे।

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