28 अप्रैल, 2017
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नोटबंदी में पैसों की तंगी के बीच इम्तियाज ने निकाह में किया कुछ ऐसा कि सैकड़ों युवक तैयार हो गए सादगी से शादी करने को

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newsofbihar.com डेस्क

मुजफ्फरपुर, 29 नवम्बर। दहेज के कारण जहां लाखों लड़कियों की शादी नहीं हो पा रही है, ऐसे में मुजफ्फरपुर के चन्दवाड़ा मोहल्ला के रहने वाले जे.एन.यु. छात्र मोहम्मद इम्तियाज ने समाज में फैली इस बुराई के खिलाफ एक अभियान छेड़ा है। उन्होंने “पहले अपने आप सुधार करो’ की मिसाल पेश करते हुए न केवल अपनी शादी में लड़की वालों से कोई सामान, पैसा या कपड़े तक नहीं लिए बल्कि लड़की के कपडे़ का भी खुद ईंतज़ाम किया, और बहुत ही सादगी के साथ यहां बी.एम.पी-6 में स्थित सर सैय्यद कॉलोनी की मस्जिद में निकाह किया। उन्होंने निकाह से पहले लड़की के पिता और मस्जिद के इमाम साहब से अनुमति लेकर दहेज के अभिशाप के विषय पर भाषण दिया। इसमें उन्होंने कहा: “लड़की रहमत है, ज़हमत नहीं, दहेज की वजह से हमने ज़हमत बना दिया है”। इसके लिए कोई दूसरा जिम्मेदार नहीं है। ‘मोहम्मद इम्तियाज ने अपने भाषण में कहा कि अल्लाह और उनके रसूल ने निकाह को सबसे आसान बनाया है, ताकी लड़की वालों पर एक पैसे का भी बोझ न हो। लेकिन लड़के को शादी का भोज (वलीमा) करने को कहा मगर इसमे भी फिजूलखर्ची से बचने के लिए कहा है।
इम्तियाज ने आगे बताया कि उनकी बातों का लोगों पर अच्छा असर देखने को मिल रहा है। इसकी मिसाल पेश करते हुए उन्होंने कहा कि वलीमा में लड़की के कई रिश्तेदार भी आए थे। इनमें एक महिला मेरे पास आकर कहने लगीं: “मेरे बेटे सगीर पर तुम्हारे मसजिद मे दिये भाषन का बड़ा असर हुआ है, उसने घर में साफ कह दिया है कि वह सादगी के साथ शादी करेगा, मस्जिद में निकाह किया जाएगा और लड़की के घरवालों से कुछ भी नहीं लिया जाएगा”। इसके अलावा मजहरुल हसन (दुलारे) नाम का एक युवक भी दहेज विरोधी अभियान में हमारे साथ आ गया है। उसने भी सादगी के साथ शादी करने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि मोहम्मद इम्तियाज ने निकाह से पहले दहेज के अभिशाप के विषय पर भाषण देने के अलावा वलीमा के दिन अपने यहां दहेज विरोधी पोस्टर भी लगाया था।

इन पोस्टरों पर “लड़की रहमत है, जहमत नहीं, दहेज की वजह से हमने लड़कीयों को जहमत बना दिया है”।

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“5 लाख लड़कीयां हर साल मां के पेट में पैदा होने से पहले ही मार दी जाती है, सिरफ दहेज की वजह से”।

जैसे सूचना और जागरूकता पैदा करने वाली बातें लिखी हुई थीं। मोहम्मद इम्तियाज के इस कदम की हर तरफ़ प्रशंसा हो रही है। लेकिन उन्हें यह सफलता अचानक नहीं मिली है। इसके लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी। उनके इस अभियान का विरोध तो सबसे पहले घर में ही हुआ। लेकिन वह हार नहीं माने और घर वालों से लगातार इस मुद्दे पर बात करते रहे। उन्होंने कहा कि घर वाले अक्सर सादगी के साथ शादी करने पर कहते हैं कि आखिर समाज में क्या मुंह दिखाएंगे, लोग क्या कहेंगे। पर यह नहीं सोचते की अललाह और पैगमबर मुहममद को कैसा लगेगा, जिनके पास पैसे नहीं वह बेटीयों की शादी कैसे करेंगे? परन्तु धीरे धीरे वालों ने खुशी खुशी न सही, लेकिन हमारी बात मान ली । गौरतलब है कि मोहम्मद इम्तियाज के पिता नेयाज़ अहमद का शहर ही में साइकिल रिक्शा का कारोबार हैं। इम्तियाज अभी उच्च शिक्षा के लिए तैयारी कर रहे हैं । उन्होंने देश के प्रतिष्ठित विशवविधयालय जे.एन.यू से बी. ए. और एम.ए. किया है । वह गरीब बच्चों को आधुनिक शिक्षा देना चाहते हैं। इसके साथ ही वह दहेज के खिलाफ अपने अभियान को आगे बढ़ाना चाहते हैं। दहेज के खिलाफ मोहम्मद इम्तियाज की इस अनोखी लड़ाई की प्रशंसा करते हुए प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता तनवीर आलम ने कहा: बड़ी खुशी की बात है कि हमारे शिक्षित युवा समाज में फैली इस बुराई के खिलाफ लड़ने के लिए आगे आ रहे हैं। इसका दूरगामी संदेश जाएगा। उनके साथी दानिश हबीब ने भी इसकी सराहना की। गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर भी मोहम्मद इम्तियाज के निकाह से पहले दिये भाषन और विशेष रूप से वलीमा के दिन पोस्टरों के माध्यम से दावत में आने वालों को दहेज़ विरोधी संदेश देने की काफी तारीफ हो रही है,और यह अपने आप मे नया और अनोखा भी है जो पहले कभी नहीं दिखा।

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