07, Dec, 2016
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मधुबनी : जनता के सवाल पर गुस्से में लाल हुए हुकुमदेव, जिलाध्यक्ष ने कह दिया पागल !

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मधुबनी, 02 अक्टूबर : अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के जयंती के मौके पर जनता को साफ़-सफाई का सन्देश देने अपने संसदीय क्षेत्र मधुबनी पंहुचे सांसद हुकुमदेव नारायण यादव बड़े गुस्से में नज़र आयें। दरअसल मधुबनी के सदर अस्पताल परिसर में गाँधी जयंती के मौके पर झाडू लगा रहे सांसद हुकुमदेव नारायण यादव से किसी व्यक्ति ने अस्पताल परिसर में नाला निर्माण के संदर्भ में सवाल किया की, नाला भी पास है यहाँ का, बनाएगा एजेंसी या हमलोग ही बनवा देंगे।
इस बात पर सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने सवाल कर रहे उस व्यक्ति पर ऐसे गुस्से से जवाब दिया की मानो उस व्यक्ति ने सवाल करके बड़ी गलती कर दी हो। सांसद यादव ने गुस्से में उस व्यक्ति को फटकारते हुए जवाब दिया की.. उसको आना है यहाँ नेतागिरी झाड़ने के लिए… तो जाओ ना वोट देकर जिस एमएलए को बनाया… बिहार में जिसका राज्य बनाया है उसका दूम पकड़ो ना। डांट फटकार यहीं नहीं रुकी… सांसद के साथ झाडू लगा रहे बीजेपी के जिलाध्यक्ष घनश्याम ठाकुर ने सवाल कर रहे व्यक्ति को पागल तक कह दिया।

यह विडियो देखने के बाद अब सवाल यह उठता है की जिस तरह मधुबनी के सांसद हुकुमदेव नारायण यादव और बीजेपी जिलाध्यक्ष घनश्याम ठाकुर का एक आम नागरिक को जनसमस्या से जुड़े सवाल करने पर इस तरह से फटकारना और अपना जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए यह कहना की जिसको वोट दिया है उसके पास जाओ, सरकार की दुम पकड़ने की नसीहत देना और जिलाध्यक्ष द्वारा पागल तक कह दिया जाना कहीं ना कहीं लोकतंत्र में आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है।
साथ ही यह बात सोचने पर मजबूर करती है की जब नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन जनता के सेवक ही करने लगेंगे तो उस जनता का क्या होगा जिसने उन्हें अपना नेता बनाया है जिसने उन्हें सेवक बनाया है। फिलहाल इस मामले में अभी तक सांसद द्वारा किसी भी तरह का बयान सामने नहीं आया है।

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2 विचार साझा हुआ “मधुबनी : जनता के सवाल पर गुस्से में लाल हुए हुकुमदेव, जिलाध्यक्ष ने कह दिया पागल !” पर

  1. DHRUB NARAYAN KARN October 3, 2016

    भाजपा जितना उपर से साफ-सफाई की बात करती है,उतना ही समाज मे सांप्रदायिकता,तानाशाही और युद्धों उन्माद का बैचारिक जहर समाज मे फैला रही हैं।

  2. dr dhanakar thakur October 6, 2016

    BHAJPA me ghuse samajwadi neta hain ve. Unko 1977 me maine danta tha Pandaul me jab chunav me gum huwe ek karykarta ke prati aisa hee shabd vyavhar kiya tha unhone. Pt. ramnanadn Mishra ne mere samne unhe 1979 me kaha tha- “Tora jati pati kahiya seekhauliyau.” Bhajpa aise netaon se mukt hio.

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