19 अगस्त, 2017
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‘लिटिल मिसाइलमैन’ पर नाज है… देश को अगला ‘कलाम’ मिलेगा बिहार से

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पटना, 29 जुलाई। बिहार के मिथिला क्षेत्र में एक कथा काफी प्रचिलित है। उस कथा के अनुसार एक राजा धूल-मिट्टी में खेल रहे एक बच्चे से उसका परिचय पूछते हैं। जवाब में वह बच्चा कहता है- हे राजन मेरी उम्र पांच वर्ष से कम है, लेकिन मेेरी सरस्वती काफी बड़ी है। मैैं बैठे-बैठे अपनी शब्दों में विश्व भर का वर्णन कर सकता हूं। कुछ ऐसा ही बिहार के एक लाल ने अपनी मेहनत से साबित कर दिखाया है।

बताते चले कि मुंगेर जिला केे 15 वर्षीय युवा वैज्ञानिक प्रभाकर जयसवाल ने अपने प्रोजेक्ट से सबको चौका दिया है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक उसे शाबाशी दे रहे हैं। उसने सोलर वीपन तकनीक विकसित की है। अगर यह तकनीक सफल हो गया तो भारत मिसाइल के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल कर सकता है। इससे एक ऐसा हथियार तैयार हो सकेगा जिसके जरिये हम किसी भी मिसाइल और रॉकेट लॉन्चर की दिशा और दशा बदल सकते है साथ ही उन्हें नष्ट भी कर सकते हैं।

जिले के छोटे से मोहल्ले रामपुर भिखारी के मध्य वर्गीय परिवार प्रमोद जयसवाल का 15 वर्षीय पुत्र प्रभाकर जायसवाल ने 18 जुलाई को चेन्नई में यंग इंडिया साइंटिस्ट 2016 में इसने एक ऐसे प्रोजेक्ट को पेश किया जिसको देखकर देश-विदेश से आये वैज्ञानिकों ने उसे शाबाशी दी।

प्रभाकर ने बताया कि आने वाले समय में पड़ोसी देश चीन और पकिस्तान से खतरों से निपटने में यह सोलर वेपन काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उसने बताया कि इस यंग साइंटिस्ट सम्मलेन में हमारा प्रोजेक्ट था कि जियो स्टेशनरी सैटेलाइट में सोलर एनर्जी को कैसे वेपन में रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके अनुसार इस सोलर वेपन को हम एंटी बैलेस्टिक मिसाइल, एंटी न्यूक्लियर मिसाइल और एंटी टैंक में हम इस्तेमाल कर सकते है साथ ही बिजली उत्पादन के क्षेत्र में सोलर वेपन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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प्रभाकर के अनुसार ‘स्पेस किड्ज इंडिया ‘ चेन्नई में अपने मॉडल सोलर वीपन के लिए ऑनलाइन अप्लाई किया था। स्पेस किड्ज इंडिया को मेरा मॉडल को पसंद आया और मुझे चेन्नई बुलाया। यंग साइंटिस्ट इंडिया 2016 के लिए 523 बच्चों ने पूरे भारत में ऑनलाइन अप्लाई किया था जिसमे 93 बच्चों का चुना गया जिसमे हम ईस्ट जॉन में सिर्फ एक ही यंग साइंटिस्ट इंडिया 2016 का अवार्ड मुझे दिया गया। स्पेस किड्ज इंडिया संस्था जिसमे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन और रशियन सेंटर ऑफ साइंस एंड कल्चर आदि जैसी संस्था साइंटिस्ट बच्चों को बढ़ावा देती है।

प्रभाकर के पिता शहर में छोटे से इलेक्ट्रॉनिक का दुकान चलाते हैं। अपने बेटे को अवार्ड मिलने से खुश हैं। उनका कहना है कि बचपन से ही प्रभाकर छोटे-मोटे अविष्कार करता था जिसको लेकर उसे घर में बार-बार डांट भी मिलती थी। उन्होंने बताया की आज हमे अपने बेटे पर गर्व है की वो देश के लिए ऐसा अविष्कार करें जिससे पूरा देश गौरव करें। प्रभाकर मुंगेर के सरस्वती विद्या मंदिर का 10़2 साइंस का स्टूडेंट है। दसवी में उसने 96 प्रतिशत अंक हासलि किए थे।

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