10, Dec, 2016
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कोजगरा स्पेशल : मैं मखाना हूं…

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सरिता कुमारी की रिपोर्ट

हम लोग मखाने का प्रयोग हर काम में करते है। चाहे वह पर्व त्योहार हो या शादी विवाह या फिर कई तरह के काम में उपयोग में लाया जाता है। हम सभी लोग इसका खीर भी बनाकर खाते है। इसक ड्राई फ्रूट भी शुमार होता है। पोपकॉर्न जैसे सफेद रंग के मखाने के बारे में कभी सोचा है ये बनता कैसे हैै। नहीं न तो आये आज आपको हम बताते है कि यह मखाने कैसे कड़े काले बीज सफेद मुलायम मखाने बन जाते हैं।

एक पौधा होता है. अब पौधे का नाम सुनके ये मत सोचने लगना ये उसपर ही आते होंगे. तो ये जो पौधा होता है वो पानी में होता है. पानी की उपरी सतह पर इसका पत्ता फैला रहता है. पानी में उसकी जड़ें होती है. पत्ते और जड़ के बीच में होता है डंठल. डंठल समझते हो अरे वही जिसे स्टेम ये तना बोलते हैं. पूरा पौधा कांटेदार होता है. इस पौधे की जड़ नारियल के जैसी दिखाई पड़ती है. लेकिन होती बहुत
सॉफ्ट है।

जड़ में तकरीबन तीस से चालीस छोटे-छोटे बीज होते हैं. ये बीज काफी सख्त होते हैं. लोग इन पौधों को पानी से जड़ समेत निकालते हैं. और उन पौधों की जड़ से बीजों को अलग किया जाता है. अब इन बीजों को ‘कोई मिल गया’ के जादू की तरह धूप चाहिए होती है. धूप मिलने के बाद ऐसे चार्ज होते हैं कि बीज कड़े होते हो जाते हैं. इसके बाद तेज आंच पर बीजों को लोहे की बड़ी-बड़ी कढ़ाही में फ्राई किया जाता है. और फिर 45-72 घंटों के लिए थालों में भरकर रख दिया जाता है. इसके बाद ये कड़े बीज सॉफ्ट हो जाते हैं।

बीजों को मखाने में बदलना भी एक कलाकारी है। जोकि एक पेशेवर मलाह ही कर सकता है। कढ़ाही में फ्राईहो रहे बीजों को हाथ से उठाकर पक्की जगह पर रखकर लकड़ी से पीटा जाता है. इस तरह गर्म बीजों का कड़क खोल तेजी से फटता है. और उसमें से पोपकॉर्न जैसा मखाना बाहर निकल आता है।
मखाने की कई तरह की रेसेपी तैयार जो होने लगी हैं उस वजह से इसकी डिमांड भी बढ़ गई है। दुनियाभर में आइटम तैयार होते हैं इससे. खीर, दलिया, सेवई, मिठाई, नमकीन की तो बात ही क्या करना, इसका इस्तेमाल तो चिकन से लेकर बिरयानी तक में होता है. इसे मसाले के साथ घी में फ्राई कर लो मजा आ जाता है. यह इतना टेस्टी होता है कि मखाने का लोग स्कूली बच्चों के लिए पास्ता भी बनाते हैं।

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