एक बार फिर से बिहार के लिए शोक बनने को तैयार है कोसी नदी, तबाही शुरू

koshi-flood-2019
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पटना। बिहार में इस साल भी कोसी का कहर देखने को मिलेंगा। जानकारी के अनुसार कोसी और सीमांचल में कई अन्य नदियां खतरे के निशान के उपर बह रहीं हैं। नदिंयों में जलस्तरो के खतरे के निशान के उपर बहने के कारण नदी किनारे बसे गांवों के लोग रतजगा करने को मजबूर हैं। यहां के लोंगो को एक बार फिर से विस्थापन का डर सताने लगा है।

कल शुक्रवार को आइ्र एक खबर के अनुसार अररिया में एक बच्ची की मौत डूबने से हो गई। वही किशनगंज और मधेपुरा में भी अब तक तीन-तीन लोग डूब चुके हैं। जानकारी के अनुसार सुपौल में कोसी तटबंध के आस पास के कई इलाको में बाढ़ की स्थिति बन आई है। मरौना प्रखंड क्षेत्र के आधा दर्जन गांव में बाढ़ का पानी जमा है। इसके अलावा दो दर्जन नये गांवों में बाढ़ का पानी घुस आया है।

थोड़ी राहत देने वाली खबर सहरसा से है जहां कोसी के पूर्वी तटबंध पर महिषी के कुंदह, नवहट्टा के 64.95 किलोमीटर स्पर पर हो रहे कटाव पर नियंत्रण पाया जा चुका है। मधेपुरा के दो दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। कोसी के जलस्तर में वृद्धि से फुलौत के निचले इलाकों में पानी फैल चुका है। अररिया जिले की बकरा व नूना समेत अन्य नदियों के जलस्तर में गिरावट आई है। कई जगहों पर पानी घटने के साथ ही कटाव तेज हो गया है।

चंद्रशेखर बांध के टूटने से जोकीहाट प्रखंड क्षेत्र की चैनपुर-मसुरिया पंचायत के कई गांवो में परमान नदी का पानी फैल गया है। यहां एक बच्ची की डूबने से मौत हो गई है। कटिहार में महानंदा का पानी खतरे के निशान से उपर है। वहीं गंगा-कोसी फिलहाल शांत हैं। अमदाबाद प्रखंड के आठ गांवों में पानी घुसने से लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन की तैयारी कर रहे हैं। मधुबनी जिले में तीसरे दिन भी कमला बलान खतरे के निशान से ऊपर रही। पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चंपारण और शिवहर से भी ऐसी ही खबरे आ रही है।

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