05, Dec, 2016
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नितीश कुमार का बयान… कुछ भी हो जाये, शराबबंदी के फैसले से नहीं हटूंगा पीछे !

पटना, 01 अगस्त : बिहार में शराबबंदी को लेकर चल रहे राजनीति के बीच आज सोमवार को बिहार विधानसभा में मद्य निषेध और उत्पाद विधेयक (संशोधन), 2016 पेश किया गया। लेकिन संसोधन के पक्ष में 153 विधायकों के वोट के साथ शराबबंदी सम्बंधित विधेयक में किसी भी प्रकार का संसोधन नहीं किया गया। जबकि संसोधन के पक्ष में 45 विधायकों ने वोट किया। जिसके बाद विधानसभा में बहस का जवाब देते हुए सीएम नीतीश कुमार ने एक बार फिर दोहराया की मैं बर्बाद हो जाउंगा, नष्ट हो जाउंगा लेकिन शराबबंदी के फैसले से पीछे नहीं हटूंगा। उन्होंने कहा कि कानून में संशोधन कर इसे और कड़ा बनाया गया है ताकि पुलिस और अधिकारी मनमानी नहीं कर पाएं। कानून में गलत करने पर पहले अधिकारियों को तीन महीने का सजा प्रावधान था अब इसे बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया और जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

वहीं ताड़ी पर प्रतिबंध पर बोलते हुए सीएम ने कहा कि ताड़ी पर प्रतिबंध जायज है, ताड़ी एक प्रकार का नशा है। विपक्ष के लोग इस पेशे से जुड़े लोगों से हितैषी नहीं है वो चाहते हैं इस समाज के लोग जिंदगीं भर ताड़ के पेड़ पर चढ़ते रहे. सरकार समाज के उत्थान के लिए काम कर रही है। ताड़ी के बदले नीरा का निर्माण किया जाएगा और फिर इसकी बिक्री की जाएगी। सीएम ने कहा कि शराबबंदी का कुछ लोग विरोध कर रहे हैं जिसमें शराब माफिया के लोग शामिल हैं। शराबबंदी से समाज और परिवार में खुशहाली आई है।

उधर भाजपा के नंद किशोर यादव ने विधेयक के सिद्धांत में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि डंडे के जोर पर नशा को दूर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वो शराबबंदी को राजनीतिक हथकंडे के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं। एकतरफ आप बिहार में शराब बनवा रहे हैं लेकिन लोगों को पीने से मना कर रहे हैं। आखिर यह कैसा कानून है जिसमें घर में शराब मिलने पर पूरे परिवार के लोगों को जेल जाना होगा। शराब मिलने पर अगर घर का मुखिया जिम्मेदार होगा तो सूबे में शराब मिलने पर जिम्मेदार कौन होगा ?

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