20 फ़रवरी, 2017
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‘कुर्सी’ पर कोहराम…दलित अधिकारी ने सीनीयर ऑफिसर पर लगाया कुर्सी तोड़ने का आरोप

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संतोष कुमार की रिपोर्ट

औरंगाबाद , 29 जुलाई। कुछ लोग दलितों को ऐसे बेइज्जत करते हैं जैसे दलितों को बेइज्जत करना उनका जन्म सिद्ध अधिकार है। सदियों से लोग दलितों को दबे-कुचलों का तमगा देते आ रहे है। रफीगंज के बटुरा के मामले के बाद दलितों कोे प्रताड़ित करने का एक और मामला प्रकाश में आया है। और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि प्रताड़ित व्यक्ति कोई अनपढ़-गरीब नहीं बल्कि हसपुरा प्रखंड प्रभारी कृषि पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार हैं।

अपने ही कार्यालय में उंची जाति के दबंग पदाधिकारी बीएओ को कुर्सी पर यह कहकर नहीं बैठने देते है कि मेरे सामने नीची जाति के लोग उंची कुर्सी पर कैसे बैठ सकते हैं, यह मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा। आपको बताते चलें कि दबंग पदाधिकारी ने बीएओ की कुर्सी भी तोड़ डाली ताकि वो कुर्सी पर ना बैठ सके। मामला बढ़ता देख बीएओ ने हसपुरा थाना में थानेदार को इस बात कि शिकायत करते हुए आवेदन दिया। लेकिन थानेदार ने यह कहते हुए आवेदन लेने से इन्कार कर दिया कि बिना उसके कार्यालय के वरीय अधिकारी के हस्ताक्षर के वो आवेदन नहीं ले सकता। वहीं मिली जानकारी के अनुसार बीएओ ने अपने साथ हुए अत्याचार के बारे में बताया कि “कार्यालय में प्रखंड कृषि समन्वयक के कार्यरत राजकुमार सिंह हमेशा मेरी अनुपस्थिति में कृषि पदाधिकारी की कुर्सी पर बैठते है। मेरे मना करने पर मेरी कुर्सी को तीन भाग में तोड़ ड़ाला और जब मैनें कुर्सी के बारे में पूछा तो मुझे जाति की गाली देते हुए मारने के लिए आतुर हो उठे। लेकिन मौके पर वहां मौजूद लोगों ने मुझे बचा लिया। सिर्फ इतना ही नहीं जब मैनें इस बात का आवेदन थाने में दिया तो मुझपर समझौता करने का दवाब बनाया जाने लगा।” साथ ही बीएओ ने यह भी बताया कि भले ही थाने में उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया हो पर वो अनुसूचित जाति आयोग में भी इसकी शिकायत करेंगे। दूसरी तरफ दबंग पदाधिकारी का कहना है कि बीएओ का आरोप झूठा है और कुर्सी किसी ने तोड़ी नहीं बल्कि प्रखंड प्रमुख चुनाव में गलती से टूट गया।

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