05, Dec, 2016
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आज से बिहार में मनाया जा रहा है ‘फेस्टिवल आॅफ हनीमून’… जानिए क्या है विशेषता

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रोशन कुमार मैथिल की खास रिपोर्ट

पटना, 24 जुलाई। आपने टीवी सीरियल, सिनेमा या रियल लाइफ में विवाह उपरांत हजबैंड-वाइफ को हनीमून पर जाते देखा होगा या प्लान करते सुना होगा। अमीर हो या गरीब सभी की इच्छा रहती है कि वह अपनी पत्नी के साथ एक शानदार जगह पर जाकर टाइम पास करें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिहार में एक ऐसा भी पर्व मनाया जाता है जो कि पूर्ण रूप से हनीमुन कांसेप्ट पर आधारित है। यह परम्परा कोई नयी नहीं अपितु रामायाण काल से चली आ रही है। फैशन के इस दौर में भी नव विवाहिता पति-पत्नी इस परम्परा को बखुबी निभा रहे हैं। आइए जानते है इस पारम्परिक हनीमुन फेस्टिवल केे बार में।

मिथिला क्षेत्र का वातावरण इन दिनों इस हनीमून फेस्टिवल केे कारण संगीतमय हो रहा है। नव विवाहिताओं का महापर्व मधुश्रावणी का शुभारंभ हो चुका है। यह पर्व अपन नाम के अनुसार ही मधु-रस से परिपूर्ण है। इसमे पति-पत्नी समवेत हो नाग-नागिन, शिव-गौड़ी आदि की पूजा अर्चना करती है। पति कितना भी व्यस्त क्यों न हो वह छुट्टी में ससुराल आने का प्रयास अवश्य करता है। इस बीच हंसी मजाक का भी दौर जमकर चलता है। बताते चले कि भागम भाग भरे दौड़ में मधुश्रावणी के कारण नव विवाहित पति-पत्नी को एक संग रहने का अच्छा अवसर मिल जाता है। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता सहित अन्य बड़े शहरों में काम करने वाले पति पहले से ही इस पर्व को लेकर तैयार रहते हंै। साथ ही छुट्टी लेकर घर पहुंचते हैं। कहा जाता है कि इस पर्व में जो पत्नी अपने पति के साथ गौड़ी-विषहारा की अराधना करती है उसका सुहाग काफी लंबा होता है। एक साथ देवी देवताओं की पूजा करते हैं को शुभ माना गया है

इस बार यह पर्व 24 जुलाई से आरंभ हो रहा है जो कि लगभग 15 दिनों तक चलेगा। नवविवाहिताओं के घर मनाये जाने वाले इस पर्व में नाग देवता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। बताते चले कि मिथिला क्षेत्र में नवविवाहिता के घर मधुश्रावणी विवाह के पहले साल में मनाया जाता है। ब्राहमण तथा कायस्थ परिवार में यह विशेष रूप से मनाया जाता है। इसमें जहां एक ओर नवविवाहिता अपने ससुराल से आये सामान का उपयोग कर वहां की आर्थिक स्थिति तथा पहनावा की जानकारी लेती है, वहीं दूसरी ओर इस व्रत के दौरान कथा के माध्यम से उन्हें सफल दांपत्य जीवन की शिक्षा भी दी जाती है। मधुश्रावणी में नवविवाहिता शाम के वक्त अपनी सखी-सहेलियों के संग फूल लोढ़ती है। इसी फूल से अगले दिन सुबह पूजा-अर्चना करती हैं। इसको लेकर शनिवार को कोहबर में विषहरि बनाया गया। गौड़ी तैयार किया गया। इस दौरान पारंपरिक लोकगीत से स्वर वातावरण में गूंजते रहे। व्रत आरंभ होने के साथ ही महिला पंडित नव दंपती को शिव तथा पार्वती के प्रसंग की कथा कह उन्हें दांपत्य जीवन की जानकारी देती है। साथ ही मोटे तौर पर आध्यात्मिक जानकारी भी दी जाती है. यथा पृथ्वी के निर्माण आदि। पति के प्रति महिला का समर्पण तथा कर्त्तव्य का बोध भी कराया जाता है। अंतिम दिन टेमी दागने तथा सुहाग मथने की परंपरा के साथ विधिवत इस पर्व का समापन होता है।

अनोखा क्यों है यह पर्व
-ससुराल पक्ष से आए अन्न एवं वस्त्र का होता है प्रयोग।
-महिला पंडित संपन्न करवाती है पूजा।
-लोक कथाओं के माध्यम से दिया जाता है संदेश।
-व्यस्तता के बाद भी इसमे शामिल होते हैं पति महोदय।
-अंतिम दिन टेमी दागने और सिंदूरदान की है परम्परा।

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6 विचार साझा हुआ “आज से बिहार में मनाया जा रहा है ‘फेस्टिवल आॅफ हनीमून’… जानिए क्या है विशेषता” पर

  1. nitesh mishra July 24, 2016

    Jai ho Mithila jai ho

    • Raj kumar July 24, 2016

      ईस फेसटिवल आँफ हनिमुन को बड़े अस्तर पर प्रचारित करने और आकर्षक बनाने की अवश्कता है।
      Happy Madhur avni. !!

    • Ashutosh mishra July 25, 2016

      Ehe t aapan mithila ke pahchan chai

  2. nilesh jha July 24, 2016

    This is the great festival for mithili keep it up thanks

  3. suman jha July 24, 2016

    ईस फेसटिवल आँफ हनिमुन को बड़े अस्तर पर प्रचारित करने और आकर्षक बनाने की अवश्कता है।
    jai mithila jai maithil……………….

  4. gagan jha July 25, 2016

    Jai mithila,jai maithil

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