22 अगस्त, 2017
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बिहार की बदकिस्मती : मरीज को घर जाने के लिए नहीं मिली एंबुलेंस तो पत्नी बनी ढाल !

lflllk

newsofbihar. com desk

रोहतास, 15 जून।

फिर वही बात हो गयी लगभग वही पुराना दृश्य. हां! अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों में गरीब व लाचार लोगों द्वारा उनके परिजनों के शवों को कभी कंधे पर, तो कभी साइकिल पर ले जाते देखा-सुना गया था, पर इस बार बात थोड़ी अलग थी। इस बार शहर के एक नर्सिंग होम में इलाज के बाद वापस घर जाने के लिए एंबुलेंस या किसी दूसरे वाहन की व्यवस्था नहीं होने पर एक महिला ने अपने बीमार पति के लिए खुद को ही एंबुलेंस बना दिया। वह बीमार पति को अपनी पीठ पर ही उठा कर घर के लिए निकल पड़ी।
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आंखों से लगातार आंसू के बूंद टपक रहे थे। देखनेवाले सभी हतप्रभ थे। कुछ लोगों को दया आयी, तो रुपये से मदद भी की। लेकिन, यह मदद नाकाफी थी। मदद इतनी नहीं थी कि उस पैसे से एंबुलेंस का जुगाड़ किया जा सके। रुपये मिलने पर बाद में उसने बस पड़ाव तक के लिए एक रिक्शे का सहारा लिया।

घटना मंगलवार की शाम शहर के रौजा रोड इलाके की है। कैमूर जिले के कुदरा थाना क्षेत्र के सकरी गांव की रहने वाली संगीता देवी के पति का पैर सड़क दुर्घटना में जख्मी हो गया था। 15 दिनों से उसका इलाज चल रहा था। कई जगह पर संगीता ने पति का इलाज कराया जब वो ठीक नहीं हुआ तो उसे सासाराम के विकास नर्सिंग होम में भर्ती कराया। संगीता के पति पूर्णमासी खरवार के इलाज में बहुत पैसे लग गये। गरीबी की मार झेल रही संगीता के पास गाड़ी किराया कर घर ले जाने की ताकत नहीं थी। ऊपर से एंबुलेंस भी नहीं मिला।

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उसने बस ड्राइवर से बीमार पति को गांव तक पहुंचाने के लिए मिन्नत भी की। लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो संगीता अपने पति पूर्णमासी को पीठ पर लाद कर गांव के लिए निकल पड़ी। हालांकि निजी क्लीनिक एंबुलेंस तो ऐसे मुहैया नहीं कराती, लेकिन वो मरीज के परिवार की हालत देखकर सरकारी एंबुलेंस के लिए मंगाने में मदद कर सकती है।

लेकिन विकास क्लीनिक वाले संगीता की मदद के लिए कुछ भी नहीं किया। संगीता की यह फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।
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