19 अगस्त, 2017
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मिथिलालोक के तत्वाधान में दिल्ली में हुआ ‘मिथिला पाग’ प्रदर्शनी का आयोजन 

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न्यूज़ डेस्क : बिहार की मिथिलांचल भूमि अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए समूचे देश में जानी जाती है। चाहे मिथिला पेंटिंग हो या गोनू झा के किस्से अथवा वहां का विशिष्ट खान-पान, देश-दुनिया में लोग मिथिला को बेहद सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। ऐसे ही मिथिला की एक विशिष्ट पहचान वहां का पाग (पगड़ी) है जिसे मिथिलावासी परंपरा से पहनते आ रहे हैं। यह पाग मिथिला के आन-बान और शान का प्रतीक है जिसे सभी महत्वपूर्ण अवसरों पर धारण किया जाता रहा है। लेकिन आज आधुनिक फैशन के दौर में लोग इसे भूलते जा रहे हैं, अतः यह जरुरी हो गया है अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए पाग के बारे में लोगों को बताया जाए। उक्त बातें मिथिलालोक फाउंडेशन के द्वारा दिल्ली के प्रगति मैदान में क्राफ्ट्स म्यूजियम में आयोजित प्रेस वार्ता में संस्था के संस्थापक चैयरमैन डॉ. बीरबल झा ने कही।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में मिथिलावासियों की एक बड़ी तादाद है जो रोजगार की तलाश में आकर यहाँ बसे हुए हैं और छोटे-बड़े सभी पदों पर काम करते हुए अपना योगदान दे रहे हैं। अपनी संस्कृति से अलग हुए लोगों को फिर से जोड़ने में इस पाग की महती भूमिका हो सकती है और इसीलिए मिथिलालोक का यह प्रयास है कि ‘मिथिला पाग’ को देश की राजधानी दिल्ली ही नहीं बल्कि दुनिया के देशों तक पहुँचाया जाए।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए क्राफ्ट्स म्यूजियम की उप-निदेशक श्रीमती निधि कामरा ने कहा कि क्राफ्ट्स म्यूजियम में पहली बार यह ‘पाग प्रदर्शनी’ लगाई गयी है जो मिथिला एवं देश की संस्कृति के लिए गौरव की बात है। खास बात यह भी है इस परंपरागत पाग को तीन रंगों के अलावा सात रंगों में बनाया गया है जो जीवन के सौंदर्य और विविधता को व्यक्त करता है। इस पाग-प्रदर्शनी के जरिए मिथिला पाग-कल्चर को निश्चित तौर पर बढ़ावा मिलेगा।
भारत सरकार के कपडा मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस पाग-प्रदर्शनी के बारे में बताते हुए डॉ. के के मिश्र ने कहा कि सिर ढकने की परंपरा लगभग सभी संस्कृतियों में रही है। संस्था ने इस परंपरा को बचाए रखने का प्रयास किया है जो बहुत सराहनीय है। पाग हमारा सम्मान है, हमारी पहचान है।

उल्लेखनीय है कि मिथिलालोक संस्था पिछले काफी समय से ‘पाग बचाओ अभियान’ चला रही है जिसका उद्देश्य इसके जरिए मैथिली भाषा, साहित्य, कला, शिल्प व परंपरा आदि के विकास और शोध को बढ़ावा देना है। संस्था की यह उपलब्धि रही है कि उसके प्रयास से विकिपीडिया ने ‘मिथिला पाग’ पर अपना एक पेज बनाया है जिसमें इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी है। इसके साथ ही संस्था ने पार्लियामेंट कमिटी ऑन पिटीशंस से ‘पाग’ को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की भी मांग की है।

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