06, Dec, 2016
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मिथिला का विश्वास लेकर सरकार बनाने वाले लोग मिथिला को ही भूल गये : पूर्व मुख्यमंत्री

सरफराज सिद्दीकी की रिपोर्ट
मधुबनी, 17 सितम्बर : बिहार के मेधावी छात्र टॉपर घोटाले के कारण बदनामी का खामियाजा झेलने का मजबूर हो रहे हैं। उक्त बातें सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र ने अररिया संग्राम के एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही। उन्होने कहा कि सूबे में 4 लाख पदों को रिक्त रखा गया है। जिसमें दो लाख शिक्षक का पद है। 16 हजार इंजिनियर है। 5 हजार डीएसपी के पद है। और पांच हजार जज के पद को भरा नहीं जा रहा है। पत्रकार हत्यारे का फोटो वायरल हो रहा है। लालू के इशारे पर नीतीश जी की शासन विहिन होकर सरकार अपने कार्यकाल को पूरा करना चाहती है। आरक्षण का कोटा बिहार से पूरा नहीं हो पा रहा है। जिस उम्मीद से लोगों ने बहुमत दिया, उस पर यह सरकार खड़ा नहीं उतरी है। सरकार 2005 और 2010 के समय के सरकारों से नहीं मिल रही है। इस सरकार में इर्दगिर्द कुछ तत्व ऐसे हैं जो सामाजिक समरसता के विरोधी है। महागठबंधन की यह सरकार 2005 के पहले की सरकार के राह पर चल रही है।
श्री मिश्रा ने मिथिलांचल के विकास पर चिंता जताते हुए कहा कि मिथिलांचल के विश्वास को लेकर सरकार बनाने वाले लोग मिथिलांचल को भूल गये हैं। मैं सरकार से मांग करता हुं। मिथिलांचल को जो दर्द मिल में मिला था। पूराने सरकारों ने इसके लिए कार्ययोजना बनाई थी कम से कम उतना तो दे ही दिया जाय। कहा कि तिरहुत, मिथिलांचल, कोशी एवं सीमांचल की अर्थिक औद्यौगिक सिचाई संबंधी योजनाएं 15 साल के राजद शासन और 10 साल के नीतीश कुमार के शासन में पूर्णतः उपेक्षित रहने के कारण इस अंचल की स्थिति निरंतर गिरती गई है। 2006 में सपष्ट चीनी उद्योग नीत बनाने के बावजूद भी रैयाम, सकरी, लोहट और बन्मखनी जैसे चीनी मिल चालू नहीं कराये गये हैं। अशोक पेपर मिल के अधिग्रहण के लिए 1989-90 में अध्यादेश स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। इसके अलोक में 50 लाख की राशि भी आवंटित हुई थी। पंडौल का सूती मिल रूण्न होकर बंद पड़ा है। श्री मिश्रा ने सरकार से प्रश्न पुछा कि बैद्यनाथ कागज कारखाना क्यों नहीं बना। पंडौल, सीवान और भागलपुर सूत मिल क्यों बंद पड़ा है। प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष सियाराम साह, बद्रीनाथ मिश्र, पप्पू साह, मो. सादुल्लाह, शंकर महतो, कृष्ण कुमार झा अमर जी, रामेश्वर मिश्र, शत्रृघ्न प्रसाद, अनंत नाथ झा, बबलू झा आदि मौजूद थे।

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ऐक विचार साझा हुआ “मिथिला का विश्वास लेकर सरकार बनाने वाले लोग मिथिला को ही भूल गये : पूर्व मुख्यमंत्री” पर

  1. आचार्य सुधीर झा September 17, 2016

    बात तो सही है मिथिला की उपेक्षा होना घोर अन्याय है क्योंकि दिनानुदिन मिथिला पिछड़ापन का ही दंश झेलने के लिए मजबूर हो रहा है और आम जनता त्राहि माम् त्राहि माम कर रही है जो मिथिला और मिथिला वासी के लिए बहुत दुर्भाग्य है

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