06, Dec, 2016
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मुहर्रम के अखाड़े का पहलाम आज, सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम !

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पटना, 12 अक्टूबर। मुहर्रम के अखाड़े का पहलाम आज है, जिसको लेकर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम के साथ मुहर्रम के ताजिया जुलूस निकाले जाने को लेकर पूरे बिहार में विशेष चौकसी बरती जा रही है। प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मुहर्रम के मौके पर पूरे बिहार के विभिन्न इमामबाड़े से निकलने वाले अखाड़े को शांतिपूर्ण ढंग से बुधवार को पहलाम कराने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। इसे लेकर पूरे बिहार में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पटना अनुमंडल के 89 स्थान संवेदनशील घोषित किए गए हैं। पत्थर का मस्जिद, तिराहे की मस्जिद व दरगाह कर्बला में अस्थायी थाने स्थापित कर यहां रैपिड एक्शन फोर्स तथा जिला बल की तैनाती की गई है। प्रशासन ने बिना लाइसेंस लेकर जुलूस निकालने वालों पर प्राथमिकी दर्ज करने की हिदायत दी है। शांति समिति के सदस्यों से मिल-जुलकर सहयोग करने की अपील की गई है। असामाजिक तत्वों व अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की बात कहीं गई हैं। 56 संवेदनशील नाकों पर पुलिस बल के साथ दंडाधिकारियों को प्रतिनियुक्त किया गया है।

दरगाह रोड स्थित इमामबाड़ा में शहर के ताजिया एवं सिपहर जुलूस के पहलाम होने तक सभी थानाध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का आदेश दिया गया है। एहतियात के तौर पर फायर ब्रिगेड एवं एंबुलेंस को सुलतानगंज थाना में लगाया गया है। ऐतिहासिक चमडोरिया इमामबाड़े से सोमवार को शिया समुदाय ने 8वीं मुहर्रम के मौके पर छाती पीटते और हाय हुसैन-हाय हुसैन, या अली मौला का मर्सिया (शोक गीत) पढ़ते हुये अलम (मातमी) जुलूस निकाला। चमडोरिया से निकला यह मातमी जुलूस अशोक राजपथ होते पश्चिम दरवाजा के पास जाकर समाप्त हुआ। जुलूस में शामिल लोगों ने बताया कि चमडोरिया से यह अलम जुलूूस विगत 107 वर्षों से लगातार निकलता आ रहा है। अलम जुलूस की महत्ता बताते हुये लोगों ने कहा कि तात्कालिक जालिम शासक यजीद ने इमाम हुसैन से अपनी वफादारी व्यक्त करने की मांग को ठुकरा दिए जाने के फलस्वरूप यजीद के सेना द्वारा इमाम हुसैन के उस छोटे से काफिले पर किए गए हमले और एक के बाद एक को शहीद किए जाने के बावजूद इमाम हुसैन द्वारा अपने नाना के बताए हुए उसूलों से न हटने और शहादत को कबूल करने की इस घटना में इमाम के छोटे भाई हजरत अब्बास का विशेष स्थान है जो आज 8वीं मुहर्रम की तिथि में जंग के मैदान में शहीद हो गए थे। उन्हीं की याद में आज का अलम जुलूस निकाला गया जो भाई के प्रति अटूट प्रेम का संदेश देता है। जुलूस में लोग काले व उजले कपड़े में थे। विभिन्न मोहल्लों से जुलूस में शामिल होने वाले अलम (मातमी ध्वजा) की संख्या सौ से अधिक थी। जुलूस के आगे बच्चों की एक टोली चल रही थी। उसके पीछे शर्बत बांटा जा रहा था। उसके पीछे दर्जनों युवक अपनी छाती पीटते हुये हाय हुसैन-हाय हुसैन-हाय कर्बला का नारा लगा रहे थे।

गौरतलब है कि पटना पूर्वी क्षेत्र में ही शहर के चारो इमामबाड़े-चमडोरिया इमामबाड़ा, शाह बाकर का तकिया, नौजरकटरा तथा पत्थर का मस्जिद के निकट इमामबाड़ा स्थित है। इसके अतिरिक्त शहर में ताजिये का बाजार इसी क्षेत्र में है जो चमडोरिया, गुरहट्टड्ढा तथा सदरगली क्षेत्र में है। जुलूस में शामिल लोगों ने बताया कि 8वीं मुहर्रम को हर इमामबाड़े में सजाए गये अलम के फूल व हार 10 मुहर्रम को सुबह नौजरकटरा की कर्बला में दफन कर दिए जाएगे और पुनरू 10 मुहर्रम की संध्या को सारे अलम शाह बाकर की तकिया में ले जाकर दफन कर दिए जायेंगे। तत्पश्चात शाह बाकर की तकिया में मजलिस-ए-शाम-ए-गरिबा होगी जिसमें मुसलमानों के अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद के पैगाम के प्रति अटूट विश्वास पर इमाम हुसैन एवं उनके साथियों के जालिम बादशाह के आगे सर झुकाने के बजाए अपने साथियों की शहादत का वर्णन किया जायेगा।

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