09, Dec, 2016
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नेत्रहीन भाइयों ने रक्षा बंधन पर बहन को दिया ऐसा गिफ्ट की, जानकर आप भी कहेंगे.. वाह !

Netrahin-bhai

नवादा, 23 अगस्त। यह कहानी किसी फिल्म या किसी नाटकों से जुड़ा हुआ नही है। बल्कि ऐसे दो नेत्रहीन भाईयों रंजीत और भूषण कि जिन्दगी की सच्ची घटना है। रंजीत और भूषण नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के बस्तीविगहा बाजार का रहनेवाले हैं। वे लोग पांच भाई और दो बहने हैं। 16 वर्षीय रंजीत सबसे बड़ा है उसके बाद कारू है फिर भूषण है उसके बाद सूरज और सुभाष है। कारू, सूरज और सुभाष स्वस्थ हैं, लेकिन रंजीत और भूषण जन्म से अंधे हैं और सुनाई भी कम पड़ता है। रंजीत और भूषण के पिता नरेश प्रसाद कुशवाहा किसान हैं। पांच कट्ठा जमीन है बंटाई की खेती कर गुजारा करते हैं। नरेश प्रसाद कहते हैं कि रंजीत और भूषण का इलाज भी कराया था, लेकिन डाक्टरों ने कहा कि रोशनी आना संभव नहीं है। डोनेट आंख से रोशनी लौट सकती है, लेकिन पैसे भी नहीं थे। लिहाजा, बेटे की आंखों की रोशनी लाने में नाकामयाब रहे। दोनों भाई घर पर बैठे रहते थे। आसपास का गाना सुनकर दोनों भाई आपस में मिलकर गाना गाते रहते थे।

घटना तीन साल पहले कि है रक्षाबंधन का त्योहार था। रंजीत और भूषण की बहन प्रियंका और पुष्पा अपने पांचो भाइयों की हाथों में राखी बांधी।
तीनों भाईयों ने प्रियंका और पुष्पा को रूपए और गिफ्ट दिए। लेकिन रंजीत और भूषण अपनी बहनों को कुछ नहीं दे पाए थे। दोनों कुछ गिफ्ट करने की स्थिति में भी नहीं थे। क्योंकि दोनों भाई जन्म से अंधे थे। कान से भी कम सुनाई पड़ता था। लिहाजा, वह घर में बैठे रहते थे, लेकिन इस दिन की घटना ने रंजीत और भूषण को काफी सदमा पहुंचाया। उसके बाद दोनों भाइयों ने मन ही मन कुछ काम करने के लिए सोच लिया। एक दिन की बात है बस्तीविगहा बाजार में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ था। उस कार्यक्रम में दोनों भाई ने शिरकत की। दोनों के गाये गीत की लोगों ने खूब तारीफ किया। उसके बाद दोनों में एक विश्वास पैदा हो गया। अब दोनों भाइयों ने इसे अपनी जिंदगी का सहारा बना लिया है। उसके बाद चलती ट्रेन, बस और सड़कों पर गाना गाने लगे। दोनों बच्चे से प्रभावित होकर लोग रुपए देने लगे। धीरे-धीरे आमदनी ठीक होने लगी। कुछ दिन बाद दोनों भाइयों को चार से पांच सौ रुपए की आमदनी होने लगी। अब स्थिति यह है कि दोनों भाई इस परिवार के तारणहार बन गए हैं। परिवार की जवाबदेही उठा ली है। यही नहीं, बहनों के लिए अलग से एक लोहे का बक्सा रखा है। इसमें आमदनी का एक बड़ा हिस्सा उस बक्से में रखता है। दोनों भाई कहते हैं कि बहन की शादी के लिए रुपए जमा कर रहे हैं। अकेले पिताजी कितना कर पाएंगे। पिछले दो सालों से रंजीत और भूषण भी बहनों को गिफ्ट कर रहा है। इस बार दानों बहनों को नए-नए कपड़े दिया। अफसोस तो इस बात का है कि मैं तो अपने बहन को नए कपड़े तो दिए। पर कैसी लगेगी यह तो उन्हें नहीं पता लेकिन उनकी खुशियों से हमसबों को काफी खुशी हुई। रंजीत और भूषण कहते हैं कि वे दोनों अपनी लाचारी के कारण नहीं पढ़ पाए, लेकिन बहनों और भाईयों को जरूर पढ़ाएंगे। इच्छा है कि बहनों को अच्छे परिवार में शादी कराएं ताकि उन्हें कोई तकलीफ नहीं हो। बता दें कि प्रियंका दूसरी कक्षा में और पुष्पा पहली कक्षा में पढ़ाई करती है। बाकी भाई भी स्कूल जाते हैं।

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