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‘मिथिला मखान’ क्यों नहीं हो पाई अब तक रिलीज ? ‘द सस्पेक्ट’ से लेकर हर सवाल का जवाब

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2 मई 2017

राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित मशहूर फिल्ममेकर नितिन नीरा चंद्रा की मैथिली शॉर्ट फिल्म द सस्पेक्ट 5 मई को रात 9 बजे यूट्यूब पर रिलीज होने जा रही है। newsofbihar.com के संवाददाता पंकज प्रसून ने फिल्म के निर्देशक नितिन नीरा चंद्रा से खास बातचीत की।

सवाल- सबसे पहले तो आप अपनी फिल्म द सस्पेक्ट की थीम के बारे में कुछ बताएं

नितिन नीरा चंद्रा- कुछ महीने पहले की बात है एक खबर पढ़ रहा था की किसी मुस्लिम लड़के को कई साल बाद जेल से छोड़ा गया जो की आतंकी होने के आरोप में पकड़ा गया लेकिन 10-12 साल जेल में रहने के बाद जुर्म साबित नहीं हो पाया और सरकार ने उसे छोड़ दिया | अब सवाल ये उठता है की संदेह के आधार पर पकडे जाने वाले ये युवा सालों जेल में काटने के बाद किस रूप में बाहर आते हैं | हम समाज को आतंकवाद से बचा रहे हैं या आतंकवाद बढ़ा रहे हैं | “The Suspect” की यही थीम है | इसको दरभंगा मॉड्यूल से जोड़ा है, क्योंकि दरभंगा को भी लोगों ने बहुत बदनाम किया है आतंकवाद का गढ़ बता कर | लोग गलतियां करते हैं, जुर्म करते हैं इससे उसके धर्म को जोड़ना सही नहीं है |

सवाल- आपने द सस्पेक्ट को मैथिली भाषा में ही बनाने का क्यों विचार किया

नितिन नीरा चंद्रा- कहानी दरभंगा के एक लड़के की है जो मुंबई जाता है | घटनाएँ मुंबई में हो रही हैं | दरभंगा का लड़का है तो मैथिली भाषा रखना ही तार्किक है | फिल्म में काफी जगहों पर हिंदी भी है |

सवाल- आपकी फिल्म मिथिला मखान को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया लेकिन बहुत लोगों का सवाल ये है कि आपने अब तक इस फिल्म को रिलीज क्यों नहीं किया

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नितिन नीरा चंद्रा- फिल्म बनाना एक बात है और रिलीज करना दूसरी बात है | रिलीज करने के लिए लगभग उतना ही खर्चा है जितना बनाने में हुआ | लेकिन जिन निवेशकों ने हाँ बोला था बाद में वो डर गए मैथिली भाषा में पैसा लगाने से | ऐसा अमूमन होता है | गैर हिंदी सिनेमा, भारत में उस समाज द्वारा ही बढ़ाया जाता है जिसकी भाषा में वो सिनेमा होता है | मुझे इंतजार है की कोइ मिथिला क्षेत्र का व्यक्ति आए और फिल्म को रिलीज करने में निवेश करे |

सवाल- मैथिली भाषा की फिल्मों के भविष्य पर कुछ प्रकाश डालें

नितिन नीरा चंद्रा- भविष्य बहुत उज्जवल है | मैथिली की जमीन उर्वरा है | लेकिन लोग डरते हैं इस जमीन पर खाद और जोताई के खर्च से | पैसा खर्च नहीं करना चाहते, रिस्क नहीं लेना चाहते | आत्मविश्वास नहीं है | लोग चाहते हैं की खेत जोतने से पहले ही उपज का दाम बाज़ार से मिल जाए या मिल जाने की गारंटी मिल जाए | मैथिली में अभी अच्छा काम हो सकता है | भोजपुरी में अब वो नामुमकिन सा हो चुका है | बिहार का सिनेमा मैथिली सिनेमा से जाने जाना चाहिए | मुझे आश्चर्य है की दरभंगा जैसे सांस्कृतिक राजधानी के सिनेमाघरों पर अश्लील भोजपुरी सिनेमा का कब्ज़ा है और मिथिलांचल के लोग उनके सामने अपना सिनेमा खड़ा नहीं कर पा रहे | मैथिली सिनेमा बांग्ला सिनेमा जैसा होना चाहिए | लेकिन जब तक इस भाषा के लोग सिनेमा साहित्य और पहचान का महत्त्व नहीं समझेंगे मिथिलांचल के जमीन पर अश्लील भोजपुरी फिल्मों का ही भविष्य उज्जवल रहेगा |

सवाल- मैथिली सिनेमा के इतिहास में पहली बार यूट्यूब पर किसी फिल्म को रिलीज किया जा रहा है…तो इसके पीछे आपकी क्या सोच है

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नितिन नीरा चंद्रा- सिनामघरों से सिनेमा और Visual Literature में बदलाव आएगा ऐसा अब मुझे नहीं लगता | क्योंकि बात अब बहुत बिगड़ चुकी है | पढ़े लिखे लोगों का पलायन हो चुका है या हो रहा है | सिनेमाघरों पर भोजपुरी वालों का कब्ज़ा है | लेकिन दूसरी तरफ 3G कनेक्शन गांव गांव पहुँच गया और ATM या Credit कार्ड लगभग सबके पास है | माध्यम बदला है | बाकी सब वही है | सिनेमा समाज की पहचान है | सिनेमा अच्छा होगा तो पहचान अच्छी होगी |

सवाल- मिथिला मखान के बाद द सस्पेक्ट ही क्यों ?

नितिन नीरा चंद्रा- मिथिला मखान के बाद मैंने बहुत सारे म्यूसिक वीडियोज़ किए | भोजपुरी की एक फिल्म भी लिखीं | हिंदी के लिए लिखा | “The Suspect” आधे घंटे की फिल्म है और कुछ लोग मिल गए थे जो इस फिल्म के लिए चन्दा देने पर राजी हो गए थे तो काफी कम पैसे में ये फिल्म बन गयी |

सवाल– छठ और होली पर बनाया गया आपका वीडियो बेहद लोकप्रिय रहा…क्या आपको नहीं लगता है कि इस तरह का एक वीडियो मैथिली भाषा में ही बनाया जाए

नितिन नीरा चंद्रा- बिलकुल बनना चाहिए | लेकिन उसके लिए लोगों को पैसा देना होगा | छठ का वीडियो भी crowd funding से बना था |

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सवाल- बिहार में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों से आप किस हद तक संतुष्ट हैं

नितिन नीरा चंद्रा- बिहार सरकार के प्रयास का अंदाजा आप इसी बात से लगा लें की, 65 सालों में बिहार की भाषा में, बिहार में, स्थानीय कलाकारों द्वारा बनी फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला लेकिन बिहार सरकार या बिहार के नेता मंत्री ने आज तक एक फोन करके बधाई तक नहीं दी | बिहार सरकार की प्राथमिकता साहित्य, कला, बिहारी, आत्मसम्मान, पहचान, भाषा, सिनेमा नहीं है | ना पहले था | बिहार सरकार को चलाने वाले तमाम लोग ये समझते हैं की वो सर्वज्ञाता है और वो जो सोचते हैं और करते हैं वो सही है | जबकि हालत ठीक उसके उलट है | बिहार सरकार सारे ग़लत निर्णय लेती है | बिहार सरकार अपने छोटे से अहंकार से नहीं निकल पाती और दूसरी तरफ जितने भी प्रतिभाशाली लोग हैं वो पलायन करते रहते हैं | बिहार सरकार का प्रयास शुन्य से भी निचे है |

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सवाल- जहां तक मैं जानता हूं कि नितिन नित्य कुछ नवीन करने में यकीन रखते हैं…तो फिर द सस्पेक्ट के बाद दर्शकों को क्या नया देखने को मिलेगा

नितिन नीरा चंद्रा- मेरी कोशिश रहती है की मैं बिहार की भाषाओं में काम करूँ, मसलन भोजपुरी मैथिली मगही अंगिका और बज्जिका उसके बाद झारखण्ड की भाषाएं मेरी प्राथमिकता हैं और उत्तर प्रदेश की | हिंदी या अंग्रेजी जो बाहर की भाषाएं हैं मेरी प्राथमिकता नहीं है लेकिन काम आएगा तो करूंगा | भोजपुरी में लघु फिल्म “पटना – 13”, “बैलून”, मैथिली में क्राइम थ्रिलर “करिया हाल्ट” पर काम चल रहा है लेकिन ये फ़िल्में बन पाएंगी या ​कब बन पाएंगी ये कहना मुश्किल है |

सवाल- newsofbihar.com के माध्यम से आप दर्शकों को क्या अपील करना चाहेंगे

नितिन नीरा चंद्रा- दर्शकों को यही कहना चाहूंगा की इंटरनेट के माध्यम से 25 रुपये में फिल्म दिखाने का model अगर सफल हुआ तो मैथिली/भोजपुरी सिनेमा के भाग्य खुल जाएंगे और सिनेमा भी बदल जाएगा | इसलिए newsofbihar.com के माध्यम से आप लोगों से हाथ जोड़कर विनती है की आप लोग youtube पर “NeoBihar” चैनल subscribe करें और 5 मई को रात 9 बजे फिल्म जरूर देखें | सिर्फ आपको अपना ATM कार्ड का इस्तेमाल करना है |

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