07, Dec, 2016
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नोटबंदी के बाद ‘महागठबंधन’ पर तालाबंदी ? ‘नमोनीतीश’ एक्सप्रेस दौड़ेगी पटरी पर !

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newsofbihar.com डेस्क।

नोटबंदी को लेकर संसद से सड़क तक घमासान मचा हुआ है। लेकिन इस सबके बीच में कुछ ऐसी खबरें आ रही हैं जिसके बाद बिहार की राजनीति में बड़ा भूचाल आ सकता है। दरअसल इस सबके पीछे भी नोटबंदी का कनेक्शन है। दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो तो नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच खिचड़ी पक रही है। खबरों की माने तो यहां तक कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार और बीजेपी के बड़े नेता लगातार संपर्क में हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टस् ने तो यहां तक दावा कर दिया है कि इसी महीने के शुरुआत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बीच गुप्त मीटिंग तक हो चुका है। हालांकि newsofbihar.com इस खबर की सच्चाई की पुष्टि नहीं करता है। राजनीतिक जानकारों की माने तो महागठबंधन के घटक दलों में दरार आ चुका है और नीतीश कुमार बीजेपी के साथ जाने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। दरअसल हाल ही में नोटबंदी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी। मुख्यमंत्री ने नोटबंदी के मसले पर खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन कर सबको हैरान कर दिया।

वहीं दूसरी ओर महागठबंधन में शामिल आरजेडी नोटबंदी के मसले पर मोदी सरकार का विरोध कर रही है। आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव नोटबंदी के मामले पर केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर आक्रामक तेवर दिखा रहे हैं। महागठबंधन की सरकार में शामिल कांग्रेस ने भी नोटबंदी के मामले पर अपना रुख साफ कर दिया है। बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी ने तो यहां तक कह दिया है कि जनता से जुड़े मामलों को लेकर कांग्रेस कोई समझौता नहीं करने वाली है और अगर जरूरत पड़ी तो वो सरकार से समर्थन वापस लेने में भी नहीं हिचकेंगे। जाहिर है कि महागठबंधन के नेताओं की बयानबाजी से साफ हो रहा है कि सबकुछ ठीक तो नहीं ही चल रहा है।

खबर तो ये भी है कि नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच सूत्रधार की भूमिका निभा रहे हैं प्रशांत किशोर। नीतीश कुमार के करीबी प्रशांत किशोर के बीजेपी नेताओं से भी घनिष्ठ संबंध हैं। हाल के दिनों में प्रशांत किशोर यूपी चुनाव को लेकर कांग्रेस के रणनीतिकार के तौर पर काम कर रहे थे लेकिन उनके कामकाज के तरीके को लेकर कांग्रेस नेता खुश नहीं है।

राजनीति का सबसे बड़ा सिद्धांत यही है कि कोई भी स्थाई मित्र नहीं होता और ना ही किसी से स्थाई दुश्मनी होती है। बिहार चुनाव से पहले जब नीतीश कुमार ने लालू यादव के साथ हाथ मिलाया था उस वक्त भी सब चौंक गए थे…अब अगर फिर से नीतीश कुमार और बीजेपी मिल जाते हैं तो इस तरह की संभावनाओं से इनकार तो नहीं ही किया जा सकता है।

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4 विचार साझा हुआ “नोटबंदी के बाद ‘महागठबंधन’ पर तालाबंदी ? ‘नमोनीतीश’ एक्सप्रेस दौड़ेगी पटरी पर !” पर

  1. बलबीर चौधरी November 25, 2016

    दिवाली डील्स वाला adv. के जगह अब कुछ नया होना चाहिए.

  2. Mukesh kumar jha November 25, 2016

    Nitish kumar bihar ke achhe neta hi.bjp me aajaye to bihar me bikas ki train patri pe aajayegi. SUBAH LA BHULA SAM KO GHAR AAJAYE TO BHULA NAHI KAH SAKTE.Aana chahiye .

  3. Umesh mahto November 25, 2016

    Mere khyal nitish ji ko hath milane me
    koi khrabi nahi h
    Agar bihar ka vikas karna h to kender ka satha hona jaruri h

  4. dheeraj kumar November 26, 2016

    nitish kumar bihar ke imandar neta the aur hai pichhle 10 salo me nitish jee ne apne achchhe kamo se bihar ka nam raushan kiya h … lekin lalu ke hath milane ke karan unka nam badnam huaa h aur bihar ka v ….is liye nitish jee b j p ke sath hi jaye to ye bihar ke nam me char chand lag jaye ga….jo ki r j d ke sath rah kr bihar back me chala gaya h…ye mera hi nhi pura bihario ka bichar h …ek bar phir se nitish .modi jinda bad

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