25 अप्रैल, 2017
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नीतीश-लालू-पासवान का महादलित प्रेम…आजादी के बाद भी नहीं मिला इस गांव को पहला मैट्रिक पास !

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कृष्ण कुमार की रिपोर्ट।

बेगुसराय, 08 सितम्बर। आजादी के 70 साल बाद भी बिहार में एक ऐसा गांव है जहां एक भी व्यक्ति मैट्रिक पास नहीं है। बताया जाता है कि जिले के सलेमपुर बारो गांव के महादलित टोला में अभी तक सिर्फ 1 बच्चा सातवीं कक्षा में कदम रख पाया है। इस गांव के उल्लेख में बताया जाता है कि यहां के लोगों ने कभी अक्षर का नाम तक नहीं जाना।

शिक्षा की लौ जलाने के लिए गांव में प्राथमिक विद्यालय मुसहर टोली की स्थापना भी की गयी थी लेकिन कर्तव्यनिष्ठा के अभाव में यह योजना सफल न हो सका। इस स्कूल में आसपास के अन्य समुदाय के बच्चे तो पढने आते हैं लेकिन महादलित टोला का एक भी बच्चा स्कूल की तरफ फटकता तक नहीं है।

बताते चलें कि इस टोला से महज कुछ दूरी पर ही ऐतिहासिक मध्य विद्यालय बारो है। जहां से 1924 में शिक्षा प्राप्त कर रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रकवि के रूप में सम्मानित हुए थे। विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रवेंद्र कुमार बताते हैं कि कई बार इस समुदाय के बच्चों का नाम नामांकन पंजी में लिखकर उसे स्कूल तक लाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन असफलता ही हाथ लगी। न तो समुदाय का कोई बच्चा स्कूल आना चाहता है और न ही इस समुदाय के कोई बुजुर्ग ही इसके लिए गंभीर हैं। समुदाय के कुछ लोगों ने कहा कि पेट के आग के सामने पढाई लिखाई के शौक को छोड़ना पड़ता है।

उधर वार्ड पार्षद सदस्य सह पूर्व मुखिया धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने स्कूल का निर्माण भी करवाया। लेकिन समुदाय में लोगों को शिक्षा के प्रति रुचि ना रहने के कारण इस समुदाय का ये हाल है।

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