09, Dec, 2016
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जज साहब, मेरी मां को उम्र कैद नहीं फांसी पर लटका दीजिए ! वजह जानकर आप हैरान रह जाएंगे…

patna

पटना, 22 सितम्बर। भागलपुर जिले में एक ऐसी मानवीय रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटना सामने आया है। जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएगे। लोअर कोर्ट ने एक महिला को अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या करने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई है। लेकिन, कोर्ट के इस फैसले से महिला के बच्चों में खुशी नहीं है। वे अपनी मां के लिए उम्रकैद नहीं फांसी की सजा चाहते हैं।

बताया जा रहा है कि इस बात का खुलास होने के बाद पिता के मर्डर में मां का ही हाथ होने से बेटा नीतीश और बेटी नीलू अपनी मां से नफरत करने लगे थे। वे अपनी मां बेबी और उसके प्रेमी मणिकांत यादव को फांसी की सजा दिलाना चाहते हैं। बच्चों का कहना है कि मां ने ही हमलोगों के ऊपर से पिता का साया उठवा दिया। कोर्ट ने जिस दिन बेबी को दोषी करार दिया था। उस वक्त भाई-बहनों ने जज से फांसी देने की सजा मांग की थी।

आपको बताते चले कि 15 फरवरी 2012 को रामानंद की हत्या करके उसकी लाश को कुएं में फेंक दिया गया था। इस वारदात को रामानंद की पत्नी बेबी ने अपने प्रेमी मणिकांत यादव के साथ मिलकर अंजाम दिया था। नीलू ने बताया कि पिता की हत्या करने के लिए मां मेरा सूट पहनकर गई थी। वो गेट में बाहर से ताला लगाकर शाम को ही चली गई थी। रात करीब 10 बजे मां आयी तो उसे सूट पर खून के छींटे थे।
खून के बारे में पूछा तो डांटते हुए बोली चुप रह वरना जान ले लूंगी। कोर्ट में नीलू ने बताया कि 15 फरवरी 2012 की रात उसने मां को खुद मणिकांत का खून लगा कपड़ा धोते देखा था। नीलू ने जब खून का कारण पूछा तो मां ने उसे डांटकर भगा दिया था। वहीं, जब मां के प्रेमी से मणिकांत से उसने पूछा तो गाड़ी चलाने के दौरान चोट लगने की बात कही थी।

जानिये कैसे बेबी और मणिकांत की पहचान हुई…
मणिकांत स्कूल की गाड़ी चलाता था। दोषी महिला का बेटा नीतीश उसी स्कूल में पढ़ता था और उसी बस से घर आता जाता था। स्कूल आने-जाने के दौरान ही मेरी मां की उससे पहचान हुई थी। फिर इसके बाद मेरी मां उस स्कूल में पानी पिलाने का काम करने लगी थी। नीतीश का पिता भी स्कूल में काम करते थे। मां का मणिकांत से गंदा संबंध था। जिससे मां को नौकरी से निकाल भी दिया गया था।

लोअर कोर्ट की जज सुषमा त्रिपाठी ने जब सजा सुनाई तो मृतक की बेटी नीलू, बेटा नीतीश भी मौजूद थे। सजा सुनाते हुए जज ने कहा कि, पत्नी द्वारा पति की हत्या कर लाश को कुएं में फेंकने की घटना करती है। इन घटनाओं से समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में दोनों को कम सजा देना सही नहीं है। इसलिए, दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी जाती है। साथ ही दोनों पर 20-20 हजार रुपए का जूर्माना भी लगाया जाता है। जूर्माने की राशि दोनों बच्चों को दी जाएगी।

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