10, Dec, 2016
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नए नोट पर मैथिली के लिए एक बार फिर ‘नोटा’ ऑप्शन !

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पंकज प्रसून की रिपोर्ट

दरभंगा, 12 नवंबर। मोदी जी ने जब 500 और 1000 रुपये के नोट को बंद करने और बदले में 500 और 2000 का नया नोट जारी करने का ऐलान किया तो मैथिलीभाषी लोग बेहद खुश हो गए। लेकिन जब उनके हाथों में 2000 का नया नोट आया तो उनकी खुशी काफूर हो गई और मैथिलभाषी मायूस हो गए। अब हम आपको उनकी मायूसी की वजह भी बता देते हैं। दरअसल मैथिली को अटल बिहारी वाजपेयी की तत्कालीन सरकार ने अष्टम सूची में शामिल किया था। भारतीय करेंसी पर अष्टम सूची में शामिल कई भाषाओं को स्थान दिया गया है। मिथिला के लोग पिछले कई सालों से भारतीय करेंसी पर मैथिली को स्थान देने की मांग करते आ रहे हैं। उम्मीद की किरण तब जगी जब इसी साल मार्च महीने में अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में खबर छपी की पीएओ की तरफ से आरबीआई को भारतीय करेंसी पर मैथिली की लिपि यानि मिथिलाक्षर को जगह देने का निर्देश जारी कर दिया गया था। इसके बाद से ही मैथिली भाषी लोग भारतीय करेंसी पर मिथिलाक्षर को जगह दिए जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे। लेकिन अब जो 2000 का नया नोट जारी किया गया है उसपर कुल मिलाकर 15 भाषाओं को जगह दी गई लेकिन मिथिलाक्षर की एक बार फिर से अनदेखी की गई।

मिथिलाक्षर को नजरंदाज किए जाने से कई मैथिल संस्थान आक्रोशित हैं। मिथिला राज्य निर्माण सेना के राष्ट्रीय संयोजक शरत झा ने तमाम मैथिल संस्थानों को एकजुट होकर इसके खिलाफ आवाज बुलंद करने का ऐलान किया है। शरत झा ने जानकारी दी है कि मिरानिसे इसके खिलाफ आंदोलन करेगी। वहीं दूसरी तरफ दरभंगा में आयोजित विद्यापति पर्व समारोह में भी भारतीय करेंसी पर मैथिली की अवहेलना के खिलाफ आक्रोश देखने को मिला। वरिष्ठ मैथिली आंदोलनकारी और कांग्रेस नेता रामनारायण झा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय करेंसी पर मैथिली को शामिल नहीं करके वादाखिलाफी किया है। देश की राजधानी दिल्ली में भी इसके खिलाफ प्रवासी मैथिलों के बीच आक्रोश देखा जा रहा है। मिथिला आंदोलन से जुड़े और कारोबारी नवीन चौधरी ने जानकारी दी है को वो जल्द ही इस मामले में पीएमओ को ज्ञापन देकर भारतीय करेंसी पर मैथिली को जगह देने की मांग करेंगे। नवीन चौधरी ने ये भी कहा है कि दिल्ली में इस मामले को लेकर मैथिलों को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है और अगर जरूरत पड़ी तो मांग के समर्थन में प्रदर्शन भी किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी मैथिलीभाषी लोगों का असंतोष दिख रहा है। वरिष्ठ मैथिल आंदोलनकारी और एबीएमपी के पूर्व नेता बीरबल यादव ने रविवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली के आवास के बाहर प्रदर्शन करने का ऐलान भी कर दिया है। बीरबल यादव ने कहा है कि नए नोट पर मैथिली की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और इसके खिलाफ वित्त मंत्री के सरकारी आवास 2, कृष्णा मेनन मार्ग पर दोपहर 12 बजे मैथिलजन विरोध प्रदर्शन करेंगे। मिथिला-मैथिली से जुड़े कई मांगो को लेकर अनशन करने वाले मनोज झा ने कहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से वादा किया गया था कि नए नोट पर मैथिली को स्थान दिया जाएगा लेकिन हमारी मातृभाषा की एक बार फिर से अवहेलना की गई। मनोज झा ने इस मुद्दे के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से आंदोलन करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

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3 विचार साझा हुआ “नए नोट पर मैथिली के लिए एक बार फिर ‘नोटा’ ऑप्शन !” पर

  1. डॉ धनाकर ठाकुर November 13, 2016

    मैथिली को नये पुराने सभी नोटो़ मों होना चाहिए। मनमोहन सरकार ने भी चही रिया था। २००४ के बाद सभी नोट पर सभी अष्टम अनुसूची के भाषाओं में होना चाहिए ा मैथिली को छोड़नो पर गुस्सा वाजिव है,

  2. शुभ नारायण झा November 13, 2016

    भक्त गानों को तब भी सुबुद्धि नहीं आयेगिबौर तमाम मैथिल भक्त नमो नाम का जप जारी रखेंगे

  3. शुभ नारायण झा November 13, 2016

    मिथिला के भक्तजनो को तब भी सद्बुद्धि नहीं आनेवाली और वो नमो का जप जारी रखेंगे ।

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