06, Dec, 2016
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सीएम-पीएम तकरार में ‘बिहारी’ किसान परेशान!

सूबे में प्रधानमंत्री फसल बीमा का दरवाजा बंद

narendramodi-nitishkumar

पटना, 1 अगस्त। केंद्र की मोदी सरकार और बिहार की नीतीश सरकार के बीच हो रही खींचातानी के कारण राज्य के लाखों-करोड़ों किसान को परेशानियों का सामना करना पर रहा है। ताजा मामला प्रधानमंत्री फसल बीमा को लेकर है।

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार एवं केंद्र के बीच प्रीमियम दरों पर तकरार के बाद सूबे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लागू होने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। यूपी व अन्य राज्यों की तुलना में बिहार को यह बीमा महंगा पड़ रहा है। इसलिए राज्य सरकार ने केंद्र को दो विकल्प दिए हैं। केंद्र प्रीमियम दरें घटाए या अपना शेयर बढ़ाए। दो सप्ताह बाद भी केंद्र ने कोई जवाब नहीं दिया है। फसल बीमा की अंतिम तिथि 15 अगस्त है। ऐसे में सूबे में इसे लागू होने की संभावना न के बराबर है।

बिहार को सबसे ज्यादा आपत्ति योजना की प्रीमियम दर पर है। एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया ने यूपी में प्रीमियम दर को 2.46 फीसद रखा है, किंतु बिहार के लिए इसी कंपनी ने दर 14.92 फीसद तय की है। राज्य सरकार को यह स्वीकार नहीं है, क्योंकि इससे राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर करीब एक हजार करोड़ का बोझ पड़ रहा है। पिछले दिनों दिल्ली में राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी केंद्र सरकार से इसे कम करने का आग्रह किया था।

राज्य सरकार ने 13 मई को ही कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू करने का फैसला लिया था, लेकिन बाद में अधिक प्रीमियम दरों के कारण इसकी अधिसूचना रोक दी गई। स्थिति यह है कि अभी तक निविदा प्रक्रिया भी अधूरी है। अब तो 15 दिनों में बीमा कंपनी व बैंकों द्वारा बाकी प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ फसलों की बीमित राशि पर किसानों को दो फीसद प्रीमियम दर का भुगतान करना पड़ेगा। रबी फसलों पर डेढ़ फीसद एवं वाणिज्यिक फसलों पर पांच फीसद प्रीमियम दर किसानों को देना पड़ेगा। बीमित राशि की बाकी दरें केंद्र और राज्य सरकारों को आधी-आधी देनी
पड़ेगी।

इस मामले में अमृत लाल मीणा, प्रधान सचिव, सहकारिता विभाग, बिहार सरकार ने बताया कि अगर बिहार की शर्ते नहीं मानी गईं तो सूबे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू नहीं होगी। हम अपने संसाधनों से पहले की तरह किसानों को फसल नुकसान की भरपाई करेंगे।

योजना के मुताबिक किसानों को खरीफ पर बीमित राशि का 02 प्रीमियम का भुगतान करना होगा। शेष राशि केंद्र और राज्य को आधी-आधी देनी है। प्रीमियम दरों में असमानता के बाद बिहार ने केंद्र को स्पष्ट कह दिया है कि वर्तमान दर पर बीमा कराना संभव नहीं होगा। केंद्र इस पर सहमत नहीं होता है तो प्रीमियम दर में अपना हिस्सा 50 से बढ़ाकर 90 करे। दो में किसी एक प्रस्ताव के मानने पर ही बिहार बीमा योजना पर काम आगे बढ़ा सकेगा।

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