10, Dec, 2016
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बिहार की बेटी को कीजिये सलाम, दिल्ली की दूसरी किरण बेदी बनी प्रज्ञा

patna

पटना, 19 नवंबर। कहा जाता है कि मेहनत अपना रंग दिखला ही देती है। जी हां, हम बात कर रहे है प्रज्ञा आनंद की जो अपने मेहनत के बल पर दिल्‍ली पुलिस में एसीपी बन गई है। नोट्रेडेम एकेडमी को मुस्‍कुराने का फिर से मौका मिला है। उपलब्धियों में एक और नाम जुड़ा है। स्‍कूल की पुरानी स्‍टूडेंट प्रज्ञा आनंद ने पिछले साल इम्‍तहान-ए-हिन्‍द माने जाने वाले सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफलता प्राप्त किया था। प्रज्ञा की मां अर्चना शरण सफलता का पूर्ण श्रेय नोट्रेडेम एकेडमी की बुनियाद को देती हैं। वह बताती हैं कि मेरी बेटी आज जो भी बनी है वह नोट्रेडेम की टीचर्स की देन है।

प्रज्ञा आनंद ने सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी दिल्‍ली जाकर की है। इम्‍तहान-ए-हिन्‍द की परीक्षा को क्रैक करने को कितनी मेहनत करनी पड़ती है, सभी जानते हैं। कभी-कभी हिम्‍मत हारनेे लगता है, पर प्रज्ञा आनंद ने स्‍वयं को कभी हारने नहीं दिया। न ही वह अपना हौसला टूटने दी। प्रज्ञा ने ठान ली थी कि मुझे हर हाल में यह परीक्षा पास करना है। इसके लिए वह पुरी रात भर पढ़ती रहती थी। इम्‍तहान-ए-हिन्‍द जो भी तैयारी मांगती, वह पूरी करती।

प्रज्ञा आनंद के टैंलेट को देखिए,उसने सिविल सर्विसेज की परीक्षा में ऑप्‍शनल सब्‍जेक्‍ट के रुप में पब्लिक एडमिनिस्‍ट्रेशन रखा। तैयारी ऐसी कि वह पब्लिक एडमिनिस्‍ट्रेशन के बेस्‍ट फाइव स्‍कोरर में रही। आज दिल्‍ली के मुखर्जी नगर जैसे इलाके में रहकर सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारों-लाखों छात्र-छात्राओं के पास प्रज्ञा के पब्लिक एडमिनिस्‍ट्रेशन सब्‍जेक्‍ट का नोट्स फोटो स्‍टेट के रुप में पहुंच रहा है। बहुत सारे फोटो स्‍टेट वाले तो प्रज्ञा के नोट्स का सेट तैयार कर रखे होते हैं। वहां प्रज्ञा और पब्लिक एडमिनिस्‍ट्रेशन एक-दूसरे के पर्याय बने हुए हैं। सिविल सर्विसेज की परीक्षा में ऑप्‍शनल सब्‍जेक्‍ट में छात्र-छात्राएं काफी संख्‍या में पब्लिक एडमिनिस्‍ट्रेशन विषय को रखते हैं।

प्रज्ञा के पिता डा. आनंद शरण पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्‍थान (आईजीआईएमएस) के बायोकेमिस्‍ट्री विभाग के डाॅक्टर है। किडनी जनित बीमारी के कारण वे अभी स्‍वयं परेशान हैं, पर प्रज्ञा के सक्‍सेस से प्राउड पिता की परेशानी कम हो गई है। प्रज्ञा आनंद के एसीपी बन जाने की खबर जब नोट्रेडेम एकेडमी में आई,तो वहां भी सभी खुश हुए। प्रज्ञा की क्‍लासटीचर्स रही टीचर्स बेहद प्रसन्‍न थीं। साथ ही प्रज्ञा की सारी सहेली भी बहुत खुश हुई। खासकर उस गर्ल्‍स गैंग को, जिसके साथ वह स्‍कूल टाइम में लड़ती रही और फिर मिनटों में झगड़े निपटाती भी रही।

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