09, Dec, 2016
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शहाबुद्दीन की रिहाई पर महागठबंधन में दौड़ी खुशी की लहर, जश्ने रिहाई काफिला में शामिल होंगे नीतीश के चार मंत्री

sahabuddin-lalu

File photo

पटना, 9 सितम्बर। हाईप्रोफाइल क्रिमिनल शहाबुद्दीन की रिहाई से महागठबंधन में खुशी की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि जेल गेट पर शहाबुद्दीन का स्वागत करने नीतीश कैबिनेट के कई मंत्री सदेह उपस्थित होंगे। इतना ही नहीं इस अवसर पर आयोजित होने वाली विशाल काफिला में भी भाग लेंगे। आपको बताते चले कि मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार इस विशाल काफिला में 4 मंत्री, 30 सरकारी गठबंधन के विधायक, 1300 गाड़िया शामिल होगी।

इस मामले में वरष्ठि पत्रकार पुष्यमित्र कहते हैं कि सुनने में भले अजीब लगे लेकिन यह सच है। जी हाँ, बिहार सरकार के हिसाब से शहाबुद्दीन ए टाइप के क्रिमिनल हैं। मतलब सरकार मानती है कि ये सुधर नहीं सकते। मगर इससे क्या फर्क पड़ता है। कम से कम सरकार के 4 मंत्रियों को तो कोई फर्क नहीं पड़ता। वे उनकी जय जयकार करने के लिए उस काफिले में होंगे। अब बस इसी बात से बिहार के राजनीतिक हलके में शहाबुद्दीन की हैसियत को समझ लीजिये।
हैरत होती है, कैसे इस व्यक्ति को 11 साल तक जेल में रखा गया? यह एक बड़ी राजनीतिक इच्छाशक्ति का नतीजा था। क्या वक्त था जब एक डीएसपी ने जेल में घुस कर इस खूंखार जानवर की पिटाई की थी। मगर अब? अब क्या यह सब मुमकिन है? सरकार के मुंह से वकार नहीं फूट रहा है। बड़े सरकार ने अपने बाघ को आजाद करा लिया है। सीवान के लोग अपने घर की सिटकिनी ठीक करा रहे हैं। दरवाजे पर ग्रिल लगवा रहे हैं। सत्यानन्द निरुपम भाई ने कहा है हम सब सीवानवासियों को ही जेल में डाल दें। कम से कम वहां तो सुरक्षित रहेंगे।

सवेरे चंदा बाबू से बातचीत हुई। कह रहे थे, अब लड़ के भी क्या करना है। मेरा मरना तो तय है। ठीक भी है। जीकर भी क्या कर रहे हैं। एक 70 साल का बुजुर्ग इस बुढ़ापे में अपने अपाहिज बेटे और बीमार पत्नी की सेवा करने को विवश है। उनके लिए खाना पकाना, उन्हें नहलाना टॉयलेट ले जाना। सब चंदा बाबू को ही करना है। ऐसे में वे कितनी लड़ाईयां लड़ें। वे सीवान में टिके हैं यही बहुत है। यह जरूर है कि इतनी हत्याओं के बाद उनके मन से मौत का भय खत्म हो गया है। मगर हमें दुःख होता है। न्याय को इतना असहाय होता देखा नहीं जाता। इतना मौन है कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

सरकार से लेकर मीडिया तक। प्राइम टाइम से लेकर डीएनए तक। विपक्ष भी मिमिया रहा है। बीजेपी का विरोध डबल कॉलम और वामदलों का विरोध सिंगल कॉलम रह गया है। पत्रकार भी राजबीर रंजन का अंजाम देखकर सशंकित हैं। फेसबुक पर लिखते हुए भी संशय होता है। बस इतना ही सुकून है कि जश्न की खबरों से परहेज किया जा रहा है।

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10 विचार साझा हुआ “शहाबुद्दीन की रिहाई पर महागठबंधन में दौड़ी खुशी की लहर, जश्ने रिहाई काफिला में शामिल होंगे नीतीश के चार मंत्री” पर

  1. sohail ahmad September 9, 2016

    कागज़ की कश्ती से पार जाने की ना सोच;
    चलते हुए तुफानो को हाथ में लाने की ना सोच;
    दुनिया बड़ी बेदर्द है, इस से खिलवाड़ ना कर;
    जहाँ तक मुनासिब हो, दिल बचाने की सोच।

  2. प्रमोद कुमार शर्मा प्रदेश अध्यक्ष जदयू उत्तराखंड September 9, 2016

    एक मुजरिम की रिहाई पर नितीश जी के मंत्री मंडल के मंत्री एक क्रिमनल की अगुवाई करेंगे ।बड़ा अजीब लगता है नितीश जी का पाक साफ दामन अब तार तार हो जायेगा
    अब लगता है की जंगल राज की सुरुवात होनेवाली है । नितीश जी को इन सब बातो का ध्यान रखना होगा नहीं तो पार्टी का बहुत बड़ा नुकसान होगा।

  3. md Khurshid alam September 10, 2016

    जब कानुन बरि कर रहा हैतो अगुवाई करने में किया दिक्कत

  4. arbind kumar September 10, 2016

    नितिश जी के सब अछे कार्यों को मिट्टी मे मिला देगा लालू
    नितिश मौन क्यों है

  5. Anjum September 10, 2016

    मुझे तो अचरज होता है मीडिया की भूमिका पर, कभी गुजरात के दंगों पर, हरियाणा में हुआ था उस पर, मध्यप्रदेश के vyapam में लगातार हो रहे मौत पर, समझौता express बलासट पर, और कितना बताऊंगा।
    आप देश के लिए कुछ करें, किसी एक के लिए नहीं।

  6. Raju September 10, 2016

    Jo hota hai ache ke liye hota hai
    Ant me jeet achai ki hoti hai
    Upar wale ki lathi me aawaj nahi hoti

  7. Nurlain Ansari September 10, 2016

    Kisi bhi apradhi ko eas samaj ke mukhya dhara se judna bahut achi bat hai, (eas india ke log sawatantara hai) mai koi pakch bipakch wala bat n kiya hon

  8. Nurlain Ansari September 10, 2016

    Kisi bhi apradhi ko eas samaj ke mukhya dhara se judna bahut achi bat hai, md Saahabuddin saheb ko jail se riha hona bahut achi bat hai

  9. Md September 10, 2016

    Nelson Mandela bhi 27 saal jail me rahe wo bhi apradhi the kya

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