07, Dec, 2016
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मधुबनी : साहित्यांगन के नौवां कृति कुम्भ का हुआ आयोजन

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​सरफराज सिद्दीकी की रिपोर्ट
मधुबनी, 2 अक्टूबर। झंझारपुर मिथिला लोक गाथा के विषेषज्ञ मनिपद्म जी का मैथिली साहित्य में अग्रणी स्थान है। वे सिद्धस्थ उपन्यासकार, कथाकार, नाटककार एवं कवि के रूप में ख्याति अर्जित किये है। वे प्रखर मिथिला मैथिली के अगदुत एवं प्रखर वक्ता भी थे। उक्त बातें साहित्यांगन के नौवें कृति कुम्भ को संबोधित करते हुए प्रो. केदार नाथ झा ने कहा कि एक तरफ से वे व्यापक उपन्यासकार भी थे। ऐतिहासिक पात्र पर अधारित विद्यापति उपन्यास लिखते हैं, तो दुसरी तरफ सनसीखज मैथिली जासुसी सबसे अधिक मिथिला लोक नायकों के गाथा पर आधारित उपन्यास राजा सलहेस लोड़िक विजय, नैका बंजारा, लवहरी कुषहरि, राय रणपाल, तथा दुलरा दयाल जैसी रचनाएं प्रमुख है। साहित्य अकादमी 1973 ई0 में नइका बनजारा उपन्यास पर साहित्य अकादमी सम्मान से इन्हें सम्मान दे चुका है।

आपको बताते चले कि आयोजन जनता काॅलेज झंझारपुर के छात्रावास में आयोजित था जबकि डा. सर गंगा नाथ झा के विषय में बोलते हुए अमल झा ने कहा कि डा. सर सोलह भाषओं के निषनात ज्ञाता थे। हिन्दी, संस्कृत, मैथिली और अंग्रजी भाषा में सौ से अधिक इनकी रचनाएं अन्तराष्ट्रीय स्तर के विद्वान इन्हे बनाता है। इन्हांेने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति के पद को भी शुशोभित किया। मिनानसा एवं न्याय और स्मृति का गंभीर अध्ययन किये थे। भारतीये मिमांसा का अंग्रजी में अनुवाद कर अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भारत को महत्व को इन्होनंे स्थापित किया। इनके पांडित्य और लेखन के बदौलत ही कम समय में ही महोमहामोहपाघ्याय, सर एवं डाॅटटरेट की उपाधि इन्हे प्राप्त हुआ। साहित्यांगन का नौवें कृति कुम्भ में उक्त दोनो विद्वानों के अलावा हरिमोहन झा, अचार्य रमानाथ झा, कुमार गंगानंद सिंह, राजा कृत्यनंद सिंह, डा. जयधारी सिंह, आनंद झा, बलराम, प्रो. महिनाथ झा, काशीनाथ मिश्र, पं. सहदेव झा, और विद्यावाचसपति मधुसुधन ओझा के जयंति पर श्रधा पुष्प निवेदित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्मनाथ झा ने किया। संचालन, संयोजन साहित्यांगन के संस्थापक अध्यक्ष मलय नाथ ‘मंडन’ ने किया। मुख्य अतिथि प्रो. सुरेंद्र भरद्वाज, पूर्व प्रमुख रामप्रीत पासवान, कवि अमरनाथ झा, पंजीकार विभूति नाथ झा, हरिदेव झा, डा. रामसेवक झा, गौरी शंकर झा, गोविंद, डा. श्रीपति सिंह, भैरवेष्वर झा, डा.बीके लाल, अक्षय नाथ मिश्र, नारायण झा, सुमन कुमार लाल, आनंद मोहन झा, अजित अजाद, सौरभ झा, रामसेवक ठाकुर, सौरभ झा, विद्याचंद बमबम, सैलजा नंद ठाकुर, षिव कुमार मिश्र सहित दर्जनों कवि और सात्यिकार मौजूद थे​।

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