सीट शेयरिंग नहीं ये है नीतीश और बीजेपी के बीच आई दूरी की असल वजह

nitish-kumar
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पटना। बिहार में महागठबंधन की सरकार से अपना नाता तोड़ एक बार फिर से सीएम नीतीश ने अपने पूराने राजनीतिक सहयोगी बींजेपी संग सरकार बनाई थी। उसवक्त उन्होने राजद और तेजस्वी यादव पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपो को इसके पीछे का कारण बताया था। लेकिन इस सरकार में भी अब जदयू और बीजेपी के बीच खटास पैदा हो चुकी है।

अभी तक इस मामले को 2019 के चुनाव को लेकर देखा जा रहा था लेकिन अब इन दोनो सहयोंगियो में आए इस खटास की एक दूसरी ही अलग वजह सामने आई है। 21 जून को विश्व योग दिवस से पहले तक बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच जो कुछ था वो 2019 चुनाव को लेकर बताया जा रहा था। लेकिन 15 जून को जेडीयू नेताओं ने प्रेस में बयान देना शुरू किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार योग दिवस पर पटना में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के साथ मंच साझा नहीं करेंगे।जिसे लेकर अंत-अंत तक एनडीए के दोनों ज्ञटक दलो के बीच खटपट रही।

जेडीयू ने सार्वजनिक ढंग से ऐलान कर दिया कि मुख्यमंत्री योग दिवस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। योग दिवस के कार्यक्रम में नीतीश कुमार के शामिल नही होने को लेकर जानकारो ने मामना की सीट शंयरिंग के मुद्दे को लेर नीतीश बीजंपी पर दबाव बनाना चाह रहे है। इसलिए ऐसा उन्होने किया। जदयू की ओर से तो यहां तक कह डाला कि 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने जेडीयू को उपयुक्त सीटें नहीं दीं तो गठबंधन टूट भी सकता है।
लेकिन इस खटास के पीछे सिर्फ 2019 का चुनाव ओर सीअ शेयरिंग ही नहीं है। फर्स्टपोस्ट की साईट पर एक खबर में यह दावा किया गया हैं दोनो के बीच आई खटास की असल वजह कुछ और ही है। इस खबर की अगर माने तो दोनों पार्टियों में तनाव की वजह सृजन घोटाले है। इस खबर में कहा गया है कि सृजन मामले में दर्ज की गई एफआईआर के कारण भी दोनो पार्टियां में दरार दिख रही हैं।

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इस वजह से बढ़ी दूरीः- आपकी जानकारी के लिए बता दे कि योग दिवस से कुछ दिन पहले 13 जून को सीबीआई ने चार प्राथमिकी 880 करोड़ रुपए के सृजन घोटाले मे दर्ज की थी। वही सीबीआई के इस कार्रवाई के बाद 15 जून को जेडीयू के नेताओं का ऐसा ऐलान करना की सीएम योंग दिवस में नही जाएंगे, किसी और ही तरफ इशारा कर रही हैं।

न्यूज साईट ने अपने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरीके से सीबीआई सृजन घोटाले को संभाल रही है, उससे जेडीयू नेतृत्व खफा हैं। सूत्रो का कहना है कि एफआईआर में कुछ एनजीओ और बैंक अधिकारियों के नाम दर्ज किए गए हैं वही इसमें कुछ ’अनाम लोगो’ के खिलाफ भी केस दर्ज हुए हैं। जैसा कि सूत्र बताते हैं, सीबीआई लिस्ट मे इन्हीं ’अनाम लोगों’ के नाम के कारण बीजेपी और जदयू के बीच दूरीयां बढ़ी हैं।

बता दे कि सृजन घोटाला जब से सामने आया है तब से जेडीयू के कुछ नेताओं के खिलाफ आरोप लगने तेज हो गए हैं। सीबीआई की एफआईआर में एक स्थानीय जेडीयू नेता शिव कुमार मंडल भी आरोपी बनाए गए हैं। जिन्हे पार्टी ने बाद में निकाल दिया। सूत्रों ने कहा कि मंडल का नाम इस मामले में नाम आना महज पेड़ की फुन्गी भर है। आगे मुमकिन है कि इस केस में जेडीयू के बड़े-बड़े नेताओं के नाम सामने आएं। चुनावों से पहले हो सकता है कि इन श्अनाम लोगोंश् के नाम सामने आएं जो बिहार में लोकसभा चुनावों की दशा-दिशा बदल दें।

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