25 फ़रवरी, 2017
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शहाबुद्दीन के ‘व्हाइट हाउस’ में ‘ब्लैकआउट’…EXCLUSIVE REPORT

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कुलदीप भारद्वाज की रिपोर्ट

सीवान, 10 अक्टूबर। 11 साल के लंबे इंतज़ार के बाद महज 20 दिनों खातिर प्रतापपुर में साहेब का पुश्तैनी आशियाना यानी वाइट हाउस गुलजार हुआ था। पूर्व सांसद शहाबुद्दीन हाइकोर्ट से जमानत लेकर आजाद हो प्रतापपुर स्थित अपनी हवेली लौटे थे। घर का मालिक वर्षो बाद लौटा था वीरानी ख़त्म हुई थी माहौल खुशनुमा हो गया पर न जाने किसकी नज़र लग गई और पुनः एक बार खुशनुमा माहौल मातमी सन्नाटे में तब्दील हो गया है।
साहब की मौजूदगी में पूरा माहौल उल्लासित और चहकता महसूस होता था। राेजाना हजारों मिलने वाले आ रहे थे। दरबार सज रहा था। लेकिन, अब एक बेचैनी भरी अजीब सी खामोशी है। दरों दीवार से लेकर चिड़िया तक खामोश है। घर तो वही पर माहौल ग़मज़दा है। रविवार को प्रतापपुर स्थित मो. शहाबुद्दीन की पैतृक हवेली में ख़ामोशी चहुओर पसरा दिखा। हवेली के सामने दुआर पर खूंटे से कुछ मवेशी बंधे थे। वो भी अनमने से माहौल के सन्नाटे को महसूस कर बेमन से दिखे।

वही पिता एसएम हसीबुल्लाह व मां की आँखों से उदासी लरज रही थी। वही दोनों के चेहरों पर बेटे के जेल जाने का गम साफ झलक रहा था। शरीके हयात हिना शहाब के अनुसार उनके शौहर के साथ नाइंसाफी हुई है। अब वे खुद पति के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ेंगी।

साहब के समर्थकों के भी चेहरे पर आक्रोश मिश्रित उदासीपन साफ़ झलक रहा है। विरोध स्वरूप अब तक सिवान गया पटना और गोपालगंज में कैंडल मार्च निकाला जा चूका है। उधर एमपी साहब भी मंडल कारा सिवान में जमानत रद्द होने के बाद कैद है पर रातें बेचैनी से गुजर रही है।

उल्लेखनिय है कि सिवान के व्यवसायी चंदा बाबू के तीन बेटों की हत्या के दो मामलों में शहाबुद्दीन आरोपी हैं। इनमें एक एसिड बाथ डबल मर्डर में वे उम्रकैद की सजा पा चुके हैं, वही दूसरे गवाह हत्याकांडमें मिली उनकी जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रदद् कर दिया। इसके बाद शहाबुद्दीन ने सिवान कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

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