09, Dec, 2016
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इस रेफरल अस्पताल की दुखभरी कहानी… सीएम ने दो-दो बार किया उद्घाटन फिर भी नहीं बदला भाग्य !

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file photo

अभिषेक कुमार झा की रिपोर्ट।

मधुबनी, 19 अगस्त। अस्पताल में लोगों का इलाज होते तो देखा होगा लेकिन क्या कभी अस्पताल को मरीज बनते देखा है ? जी हाँ, बताया जाता है कि मधुबनी जिले के जयनगर अनुमंडल अस्पताल की स्थिति कुछ ऐसी बनी हुई है। करोड़ों की लागत से बने इस अनुमंडल अस्पताल को अपने पहले मरीज को भी देखना नसीब नहीं हुआ और लगभग पाँच वर्षों से बनकर तैयार इस हाईटेक अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लगा हुआ है।

दो बार उद्घाटन हो चुके इस अस्पताल की दशा इतनी खराब है की लगता है जैसे कोई भूत बंगला हो। भवन के खिड़कियों के सभी शीशे टूट चुके हैं। दरवाजे जड़जड़ अवस्था में हैं। भवन भी जगह जगह टूटने लगे हैं। मजे की बात तो यह है की यहां कोई मरीज तो भूले भटके भी नहीं आता लेकिन दर्जनों सुअर भटकते हुए सदैव मिल जाएंगे।

मधुबनी जिला मुख्यालय से लगभग चालीस किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित जयनगर अनुमंडल का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह नेपाल बॉर्डर पर अवस्थित है। जयनगर अनुमंडल में दो सौ से अधिक फर्जी एवं सही डॉक्टर यहाँ पर है। लगभग दस लाख की आबादी के लिए जयनगर मुख्य बाजार है और इलाज का इकलौता जगह। इस रेफरल अस्पताल के चालू होने से नेपाल के दो सौ से अधिक गांव को फायदा होगा।

सड़क विहीन इस क्षेत्र के कई लोग इलाज के समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। क्योंकि जयनगर मधुबनी पिछले कई वर्षो से टूटा पड़ा है और मधुबनी जाने में लगभग दो घंटे का समय लगता है। टूटे सड़क की वजह से गर्भवती महिलाएं तथा ह्रदय रोग के मरीज मधुबनी पहुँचते पहुँचते दम तोड़ देते हैं।

स्थानीय समाजसेवी भूषण सिंह कहते हैं कि मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने इस अस्पताल का दो बार उद्घाटन किया लेकिन अभी तक यह अस्पताल चालु नहीं हुआ है। सुअरों का झुण्ड यहाँ घूमते रहता है। अस्पताल में बिजली का काम कर रहे मिस्त्री ने बताया कि काम अंतिम चरण में है जल्द ही काम को पूरा कर लिया जाएगा।

भारत नेपाल के संबंधों को देखते हुए भी इस अस्पताल की आवश्यकता बहुत ही महत्वपूर्ण है लेकिन कभी भवन निर्माण तो कभी प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह अस्पताल अपने पहले मरीज की तालाश में है। अस्पताल की दसा स्वयं आज मरीज जैसी बन चुकी है।

इस मामले पर मधुबनी के जिला पदाधिकारी गिरिवर दयाल सिंह ने बताया कि अभी तक भवन निर्माण कंपनी ने स्वास्थ्य विभाग को सुपुर्द नही किया था लेकिन अब हमने सिविल सर्जन और एसडीएम को निर्देश दिया है कि भवन के लिए आवश्यक वस्तुओं का लिस्ट बना लें और सम्बंधित विभाग को इसकी सूचना दे कर मरम्मत करवाएं।

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