24 जून, 2017
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टापर्स स्कैम : अनुकंपा पर कैसे सेठ बन बैठा ‘अदना’ सा विकास !

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पटना, 11 अगस्त। क्या कोई अदना सा कर्मचारी अनुकंपा की नौकरी बन धन्ना सेठ बन सकता है। टापर्स स्कैम मामला में हुए नए खुलासे से तो ऐसा ही जान पड़ता है। बताया जा रहा है कि बिहार इंटरमीडिएट काउंसिल का स्टोर कीपर विकास सिंह अनुदान की नौकरी के बदौलत सेठ बन गया। तृतीय श्रेणी के पद पर कार्यरत रहकर उसने करोड़ों की संपत्ति बना ली। पॉश इलाका न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी में प्रमिला सदन नामक उसका आलीशान मकान है। इसके अलावा वह कई होटलों का मालिक बताया जाता है। कोतवाली थाना पुलिस और विशेष सेल की संयुक्त टीम विकास की काली कमाई से अर्जित चल-अचल संपत्ति का पता लगाने में जुट गई है।

बताया जा रहा है कि विकास के पिता रामशुभग सिंह शिक्षा विभाग में कार्यरत थे। वह भी लंबे समय तक बिहार बोर्ड में सेवारत रहे। उनके आकस्मिक निधन पर प्रावधान के तहत बेटे विकास सिंह को तृतीय श्रेणी के पद पर नौकरी मिल गई। उसके पास इंटरमीडिएट काउंसिल के माध्यमिक प्रभाग का स्टोर कीपर होने के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां थीं। विकास लंबे समय से सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगाता आ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक विकास के संपर्क में सिर्फ विशुन राय कॉलेज का प्रिंसपल बच्चा ही नहीं था, बच्चा जैसे दो दर्जन कॉलेज के प्राचार्य थे। स्ट्रांग रूम से कॉपी बदलकर बंडल में लिखी हुई दूसरी कॉपी को डाला देता था। यह लाभ उन्हें दिया जाता, जो लालकेश्वर, हरिहर नाथ और विकास के करीबी हो। छात्रों की संख्या के मुताबिक डिमांड पर गुजरात से मंगाई कॉपियां अतिरिक्त शीट में काम आती थी।

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