22 अगस्त, 2017
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ये कथा है बाबा कुशेश्वर नाथ की…क्यों कहा जाता है मिथिला का बाबाधाम?

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दरभंगा, 21 जुलाई। सावन आरंभ हो चुका है। शिव भक्त विभिन्न शिवालयों में जाकर बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित कर रहे हैं। न्यूज आॅफ बिहार आप सभी शिव भक्तों के लिए सावन स्पेशल सीरीज लेकर आया है। इस दौरान हम आपको बिहार के विभिन्न कोने में स्थित प्रसिद्ध शिवालय से आपको परिचित करवाएंगे। आइए आज जानते है बाबा कुशेश्वर स्थान के बारे में।

दरभंगा जिला मुख्यालय से लगभग 60 किमी की दूरी पर स्थित है बाबा कुशेश्वर का शिव मंदिर। शिव भक्तों द्वारा इसे मिथिला का बाबा धाम भी कहा जाता है। यहां वैसे तो सभी दिन शिव भक्तों का आना जाना होता है। लेकिन शिवरा़त्री और सावन महीने में शिवभक्तों का रेला उमड़ जाता है। लोग सुबह से ही बाबा कुशेश्वर नाथ को जलार्पण करने पहुंच जाते है। प्रशासन की ओर से भी सावन में शिव भक्तों के लिए विशेष ध्यान रखा जाता है।

बताते चले कि यहां उत्तर बिहार और नेपाल के पड़ोसी जिलों के अलावा पश्चिम बंगाल और झारखंड से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि बाबा कुशेश्वर नाथ अंकुरित महादेव हैं। ऐसी मान्यता है कि बाबा कुशेश्वर नाथ से जो भी भक्त सच्चे मन से मनौती मांगता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।

किंवदंती है कि सैकड़ों साल पहले इस स्थान पर कुश का घना जंगल हुआ करता था। जंगल में चरवाहे पशु चराया करते थे। जंगल में बाबा स्वयं प्रकट हुए थे। लगभग 19 वीं सदी में रामपुर रौता गांव के एक चरवाहे खागा हजारी ने सबसे पहले शिवलिंग के दर्शन किए। दरअसल उसने देखा कि दुधारू गायों का दूध एक स्थान पर गिर रहा है। उसने यह बात गांव के लोगों को बताई। कहा जाता है कि उस स्थान पर जब खुदाई कराई गई तो वहां एक शिवलिंग मिला। तभी से वहां पूजा-अर्चना होने लगी। बाबा के स्वयं प्रकट होने की वजह से ही इन्हें अंकुरित महादेव कहा जाता है।

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धीरे-धीरे बाबा कुशेश्वर नाथ की प्रसिद्धि पूरे मिथिला में फैल गई। आज ये मंदिर उत्तर बिहार, नेपाल, पश्चिम बंगाल और झारखंड के शिवभक्तों में लोकप्रिय है। साल 1902 में पहली बार यहां ग्रामीणों के सहयोग से फूस का मंदिर बनवाया गया। वर्तमान मंदिर साल 1970 में स्थानीय व्यापारियों के दान की राशि से बनवाया गया। कुशेश्वर नाथ बाबा के दर्शन के लिए सावन में सबसे अधिक लोग जुटते हैं। यहां हर साल पांच लाख से ज्यादा लोग दर्शन करने और जलाभिषेक करने आते हैं।

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