10, Dec, 2016
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क्या डॉन को तिहाड़ भेजना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन है? क्या फैसला लेगा सुप्रीम कोर्ट शहाबुद्दीन मामले में…

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newsofbihar.com डेस्क

पटना, 01 दिसम्बर। शहाबुद्दीन मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। आपको बता दें कि शहाबुद्दीन के खिलाफ चंदा बाबू के बेटे की हत्या के मामले में सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में शिफ्ट करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और आज इसपर सुप्रीम कोर्ट सुना सकता है अपना फैसला।
इससे पूर्व, सुप्रीम कोर्ट ने राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन मामले में सुनवाई के दौरान सोमवार को टिप्पणी की थी कि हमारा हमेशा प्रयास रहता है कि आपराधिक मामलों में निष्पक्ष सुनवाई हो। शहाबुद्दीन का मामला गवाहों की सुरक्षा और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत पर विचार के लिए एक टेस्ट केस की तरह है।
यह टिप्पणी जस्टिस दीपक मिश्रा ने शहाबुद्दीन को सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में शिफ्ट करने और उसके खिलाफ 45 अन्य मामलों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।
जस्टिस दीपक मिश्र और अमिताभ राय की पीठ ने सोमवार को संक्षिप्त सुनवाई के बाद मामले को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया था। पीठ राजदेव रंजन की पत्नी आशा रंजन की याचिका पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने कहा कि हमें यह देखना होगा कि ट्रायल निष्पक्ष हो।
पीठ ने कहा कि शहाबुद्दीन पर सभी केस तभी दर्ज हुए हैं जब वह जेल में थे। 44 केस बिहार में और एक केस झारखंड में है। इस हिसाब से वह एक हिस्ट्रीशीटर हैं। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर एएसजी पीएस नरसिंहा ने भी कहा था कि शहाबुद्दीन को केसों के साथ दिल्ली स्थानांतरित करना चाहिए।
वहीं सर्वोच्च न्यायालय दो याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा है। सिवान के एसिड बाथ डबल मर्डर व उसके गवाह की हत्या मामले में तीन बेटों को गवां चुके चंदा बाबू ने राजद नेता के खिलाफ चल रहे मामलों को सीबीआइ को सौंपने की मांग की है। साथ ही शहाबुद्दीन को सिवान से तिहाड़ जेल भेजने की भी मांग रखी है। दूसरी याचिका में सिवान के पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में मृतक की पत्नी आशा रंजन ने भी शहाबुद्दीन को तिहाड़ भेजने की मांग की है।
इन मामलों में सीबीआइ ने अपनी अनापत्ति पहले ही दर्ज कर दी है। मंगलवार को बिहार सरकार ने भी कोर्ट को बताया कि उसे शहाबुद्दीन के तिहाड़ भेजे जाने पर आपत्ति नहीं है। हालांकि, शहाबुद्दीन का पक्ष रखने के लिए न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नेफाडे ने संबंधित याचिका का विरोध किया। उन्होंने ने कहा कि इससे शहाबुद्दीन के संबंधियों का उनसे मिलने के अधिकार का हनन होगा। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा औऱ न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने कहा कि यह गवाहों की सुरक्षा और निष्पक्ष सुनवाई के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मामला है।सुप्रीम कोर्ट ने राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन मामले में सुनवाई के दौरान सोमवार को टिप्पणी की कि हमारा हमेशा प्रयास रहता है कि आपराधिक मामलों में निष्पक्ष सुनवाई हो। शहाबुद्दीन का मामला गवाहों की सुरक्षा निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत पर विचार के लिए एक टेस्ट केस की तरह है। यह टिप्पणी जस्टिस दीपक मिश्रा ने शहाबुद्दीन को सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में शिफ्ट करने और उसके खिलाफ 45 अन्य मामलों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिपण्णी पर शहाबुद्दीन के वकील ने आपत्ति जताया था। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि क्यों ना शहाबुद्दीन को सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में स्थानांतरित करने के साथ-साथ उसके सभी केसों की सुनवाई भी दिल्ली में स्थानांतरित कर दी जाए? इस पर शहाबुद्दीन के वकील ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उस पर दर्ज सभी मामले राजनीति से प्रभावित और झूठे हैं। मीडिया ने उन्हें आपराधिक पृष्ठभूमि का साबित कर दिया है। ज्यादातर केस तो तब दर्ज किए गए जब वे जेल में थे। केसों को दिल्ली ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं शहाबुद्दीन के वकील के दलील के जवाब में याचिकाकर्ता चंदा बाबू की ओर से पेश वकील ने कहा कि जेल में रहते हुए ही उन्होंने यह सब किया है। ऐसे में जेल से बाहर रहने पर वह बहुत कुछ कर सकते हैं। शहाबुद्दीन से बिहार की पुलिस इस कदर खौफजदा है कि उसने चंदाबाबू के तीसरे बेटे की हत्या में शहाबुद्दीन को नामजद तक नहीं किया है। शहाबुद्दीन के खिलाफ गवाही देने वाले की हत्या कर दी जाती है। ऐसे में शहाबुद्दीन को केवल दिल्ली की तिहाड़ जेल में ट्रांसफर किया जाना चाहिए, बल्कि चंदा बाबू के तीसरे बेटे की हत्या के मामले में बिहार पुलिस द्वारा की गई जांच को दरकिनार कर सीबीआइ को मामले की दोबारा से जांच के आदेश दिए जाने चाहिए।
इससे पहले सीबीआइ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीके डे और पी नरसिम्हन ने पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड मामले में स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक सीलबंद लिफाफे में पेश की थी।

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