10, Dec, 2016
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स्वास्थ्य मंत्री के गांव का अस्पताल है बीमार, नहीं आते है डॉक्टर !

Gopalganj-hospital

अखिलानंद मिश्रा की रिपॉर्ट

पटना, 03 सितम्बर : सूबे के स्वास्थ मंत्री तेजप्रताप यादव के पैतृक गांव फुलवरिया में बना उनकी दादी के नाम से मरछिया देवी रेफरल अस्पताल आज अपने बदहाली पर आसु बहा रहा है। बता दे की यह अस्पताल 1992 में बिहार के तत्कालीन मुख्य मंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादय ने अपने क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ के प्रति चिंचित देखकर अपने ही गांव में रेफरल अस्पताल का स्थापना कराया और यहाँ इलाज का दौड़ शुरू हुआ। और जब तक सरकार रही तब तक इलाके के लोगों को 24 घंटे इमरजेंसी जैसी सेवा मिलती थी। लेकिन आज हालात यह है की सूबे में दो-दो मंत्रियो के रहते हुवे भी गांव में बना उनके दादी के नाम से मरछिया देवी रेफरल अस्पताल को खुद इलाज की जरुरत पड़ने लगी है।
बता दें की शनिवार के दिन अस्पताल कैम्पस में तब अफरा तफरी का माहौल बन गया, गोपालपुर थाना क्षेत्र के सुजानपुर गांव के गोरख राम नाम के एक युवक अपने माँ कमलावती देवी के साथ 10:20 अस्पताल पहुचा जिसकों लावारिस कुतों ने स्कूल जाते वक्त काट लिया था। अस्पताल पंहुच कर देखा तो अस्पताल बंद पड़ा हुआ था और कोई डॉक्टर भी नही मौजूद थे। उसके तुरंत बाद बथुआ बाजार के अनीता देवी पहुची जो बुखार से पीड़ित थी। उन्होंने भी देखा की ओपीडी बंद पड़ा हुआ है। 10:30 बजे तक अस्पताल नही खुला था जबकि ओपीडी 8 बजे तक खुल जाना चाहिए। साथ ही फुलवरिया गांव के एक युवक मुन्ना यादव जिसके पेट में दर्द था। उन्होंने भी देखा डॉक्टर मौजूद है। और सबसे बड़ी बात तो यह है की अस्पताल के प्रभार में पहुचे डॉ लोकनाथ सिंह से पूछा गया तो बताये की मरीज समय से नही पहुचते है तो समय से अस्पताल खोल कर बैठने से क्या फ़ायदा। इसी बात को लेकर मरीजों के साथ ग्रामीणों ने अस्पताल के पास जमकर हंगामा किया। लेकिन सवाल यह है की जब स्वास्थ्य मंत्री के गाँव का अस्पताल अपनी दुर्दशा परआंसू बहा रहा है तो बांकी सरकारी अस्पतालों की हालात क्या होंगी।

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