अरवल और पटना की सीमा पर एक मंदिर ऐसा भी : जहाँ आत्ममुग्धता और शांति है !

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पंकज कुमार सिंह की रिपोर्ट

जहानाबाद, 16 जून।

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अरवल और पटना जिले की सीमा पर अवस्थित इमामगंज जिसे नक्सलवाड़ी के रूप में जाना जाता था। समय और माहौल के अनुसार अब यहां का हालात बदल चुका है। हिंसा-प्रतिहिंसा के नक्सल गतिविधियों से इस इलाके के लोग बाहर निकल कर मुख्यधारा में जुड़ चुके हैं। गोलियों की तड़तड़ाहट की बजाय अब इस इलाके में वेद मंत्रों की स्वच्छ ध्वनि गूंज रही है। जिससे इलाका भक्ति के वातावरण में सराबोर हो रहा है।
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काशी से पधारे शैलेंद्र आनंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यज्ञ से न सिर्फ आध्यात्मिक माहौल पैदा होता है बल्कि इससे प्रकृति भी शुद्ध होती है। यज्ञ के महत्व के संबंध में इन्होंने विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि अति प्राचीन काल से हमारे समाज में यज्ञ महायज्ञ की परंपरा चली आ रही है। जिसके वैज्ञानिक व आध्यात्मिक फायदे हैं जो अवर्णनीय है।

इस महायज्ञ में आस-पास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जुट रहे लोगों की व्यवस्था की जिम्मेदारी में लगे संचालक कृष्णा प्रसाद गुप्ता अध्यक्ष शशि कपूर सिंह उपाध्यक्ष विष्णु कुमार सचिव सुनील कुमार कोषाध्यक्ष कुमुद रंजन ने बताया कि वृंदावन से पधारे हुए रासलीला मंडली के द्वारा आकर्षक श्रीकृष्णलीला का सजीव चित्रण किया जा रहा है।
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