07, Dec, 2016
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दादी के दर्द को देखकर इस बिहारी ने बना दिया स्टेफेन हॉकिंग के जैसा व्हीलचेयर

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newsofbihar.com डेस्क

पटना, 29 नवम्बर। आशुतोष प्रकाश बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में फाइनल इयर के स्टूडेंट हैं। आशुतोष ने एक ऐसी व्हीलचेयर का निर्माण किया है जो बैटरी से चलेगी और इसे आवाज़ से कण्ट्रोल किया जा सकेगा। आशुतोष के अनुसार उनकी दादी से उनको प्रेरणा मिली जिसने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
व्हीलचेयर का उपयोग बहुत आसान है और मुंह से लेफ्ट, राईट, फॉरवर्ड और रिवर्स करने पर यह चलती है और निर्देशानुसार दिशा बदलती है। व्हीलचेयर में लगे सेंसर उसको सामने आने वाले अवरोधों के बारे में आगाह करती है और व्हीलचेयर खतरे को भांप रुक जाती है। आशुतोष के द्वारा बनाये गए व्हीलचेयर की तुलना स्टेफेन हॉकिंग के व्हीलचेयर से की जा रही है। आशुतोष बताते हैं कि उनकी दादी किसी और से मदद लेना पसंद नहीं करती। वह अपने दिनचर्या का काम खुद करना पसंद करती है। उन्हें किसीका हाथ पकड़ कर चलने से परहेज है। मैं जानता हूँ ऐसे और लोग हैं जो दूसरों से मदद लेना पसंद नहीं करते।
आशुतोष ने इस व्हीलचेयर का निर्माण इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी पटना में पाने इंटर्नशिप के दौरान किया। उन्होंने बताया कि व्हीलचेयर बनाने का खर्च तकरीबन 20000 रूपये है और यह वौइस् सिग्नल और दिशानिर्देशक के साथ आता है। आशुतोष के अनुसार यह व्हीलचेयर 80 किलो तक के व्यक्ति के लिए आरामदायक है। उनके अनुसार उन्होंने इसका निर्माण लाभ और पैसे के लिए नहीं किया है। वो इसके द्वारा लोगों की मदद करना चाहते हैं और लोगों की मदद करना ही उनका उद्देश्य है।

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