22 जून, 2017
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तिहाड़ के बाद अब बिहार की जेलों में भी ‘रूपांतरण यात्रा’ की जरूरत….इतिहास में पहली बार किया गया अनूठा प्रयोग

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वरिष्ठ पत्रकार भव्य श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से साभार

पिछले 14 दिनों से धर्म नगरी हरिद्वार में चल रहे ऐतिहासिक *रूपांतरण यात्रा* के प्रथम चरण का समापन संपन्न हुआ। सभी 18 कैदी धर्म व संस्कार का ज्ञान लेकर तथा अपने आप को रूपांतरित करके हरिद्वार के चेतन ज्योति आश्रम से तिहाड़ जेल(आश्रम) पहुँचे। । आपराधिक वारदातों के चलते जेलों में बंद कैदियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए पंचवटी योगाश्रम एवं नेचर क्योर सेंटर तथा तिहाड़ प्रशासन के सयुंक्त सौजन्य से दुनिया में पहली बार इस तरह की अनूठी कोशिश की गयी है।
इस अनोखे प्रयोग के तहत तिहाड़ जेल के 18 कैदियों को रूपांतरण के लिए देव नगरी हरिद्वार ले जाया गया था। ये सभी फरलो पर बाहर आये थे। ये वो कैदी हैं जो लंबी अवधि से जेल में बंद है और अभी तक एक बार भी बाहर नहीं निकले। तिहाड़ प्रशासन का कहना है कि आज तक एक साथ इतनी बड़ी संख्या में कैदी बाहर नहीं निकले थे।

बिना सिक्योरिटी तामझाम के कैदियों ने योगऋषि स्वामी आशूतोष जी के सानिध्य में 21 सितम्बर 2016 को इस यात्रा की शुरुआत की और हरिद्वार पहुँचे। जहाँ चेतन ज्योति आश्रम में उनके रहने की व्यवस्था की गयी थी।
हरिद्वार के पतित पावन गंगा तट पर उन्हें संस्कार व सनातन संस्कृति से रूबरू कराया गया। 14 दिन की रूपांतरण यात्रा में कैदियों ने मुंडन, उपनयन संस्कार, श्राद्ध , तर्पण, मंत्र जाप, गंगा स्नान, दैनिक यज्ञ, रुद्राभिषेक, प्रवचन सत्संग, संकीर्तन किया तथा प्रतिदिन योग व ध्यान का भी अभ्यास किया।

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जिंदगी का एक चौथाई हिस्सा जेल में बिताने के बाद तिहाड़ जेल को ही अपनी दुनिया मान बैठे कैदियों ने जब बहरी दुनिया में कदम रखा तो उनकी आँखें भर आयी। गंगा में डुबकी लगाने का मौका मिलना, उनके लिए सचमुच अनदेखे सपने के सच होना जैसा ही है। यह दृश्य भावुक कर देने वाला था। इस यात्रा का मकसद है कि जेल से रिहा होने के बाद ये सभी कैदी एक बदले या अपराध की राह पर चलने की भावना न लेकर जाएँ। धर्म, संस्कार , प्रवचन, योग व ध्यान सहित अन्य माध्यमों से उन्हें फिर से मानवतावादी बनाने की कोशिश शुरू हुई। अध्यात्म के माध्यम से इन कैदियों को प्रतिशोध की भावना का त्याग कर प्रायश्चित का पाठ पढ़ाया गया तथा जीवन में प्रेम, सेवा,दान और भक्ति का असल महत्व भी समझाया गया। इस तरह उनके अंदर की सकारात्मक ऊर्जा को वापस लाने की कोशिश में सफलता प्राप्त हुई और अभूतपूर्व परिवर्तन देखा गया।

इस यात्रा का बेहद ही सकारात्मक प्रभाव कैदियों के जीवन पर पड़ा है, सभी कैदियों ने खुले मन से स्वीकारा है कि उनका हृदय परिवर्तन हुआ है और वे बेहतर मनुष्य बन कर समाज की मुख्य धारा में लौटना चाहते हैं।साथ ही साथ सभी कैदियों ने माँ गंगा का प्रण लिया है कि जबतक तिहाड़ आश्रम में हैं, इस यात्रा में मिले ज्ञान एवं अपने अनुभवों के द्वारा दूसरे कैदियों का भी हृदय परिवर्तन करेंगे और उनके जीवन में भी खुशहाली लाएँगे।

योगऋषि स्वामी आशुतोष जी
पंचवटी योगाश्रम एवं नेचर क्योर सेंटर
C-15, साऊथ एक्स पार्ट-1
नई दिल्ली -110049
फोन: 011-46010021
Mob: 9810126656, 9873508486
E:- panchawatiyoga@gmail.com
W:-www.panchawati.org

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वरिष्ठ पत्रकार भव्य श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से साभार

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