25 अप्रैल, 2017
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स्वतंत्रता आंदोलन में 11 अगस्त क्यों है महत्वपूर्ण !

Sat-Saheed

पटना, 11 अगस्त। कुछ दिन बाद ही हम अपने देश की 70वीं स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में जगह-जगह समारोह का आयोजन करेंगे। आजादी का उत्सव मनाएंगे। झंडा फहराएंगे। हालांकि यह आजादी उतना आसान न था जितना आज लग रहा है। झंडा फहराना भी अंग्रेजों के समय में कानून अपराध माना जाता था।

बिहार की राजधानी पटना स्थित शहीद स्मारक तो आपको याद ही होगा। जहां सात शहीदों की प्रतिमा को लगाया गया है। साथ ही दिखाया गया है कि तिरंगा फहराने के लिए कैसे वह गोली के शिकार बन गए। अपनी जान का परवाह किए बिना वह सातों बलिदानी मातृभूमि के लिए न्योछावर हो गए।

बताते चले कि आज से 74 साल पहले 11 अगस्त को ही उन सातों वीरों ने बलिदान दिया था। आजादी प्राप्त करने वाले यह सभी भारत मां के सपूत छात्र थे। वर्ष 1942 को दो बजे दिन में पटना के सचिवालय पर झंडा फहराने निकले थे। तत्कालिन पटना के जिलाधिकारी डब्लयू जी आर्थर के आदेश पर पुलिस ने गोलियां चलाई थी। जानकार बताते हैं कि 13 से 14 राउंड गोलियों चलाई गई थी।

कौन थे ये सातों सपूत
उमाकांत प्रसाद सिंह, रामाकांत सिंह, सतीश प्रसाद झा, जगपति कुमार, देवीपथ चैधरी, राजेन्द्र सिंह और राम गोविंद सिंह।

क्या हुआ था उस दिन
-चैदह वर्षीय देवीपद चैधरी ने किया था इस अभियान का नेतृत्व।
-वर्तमान बंगलादेश के सिलहट के जमालपुर गांव के रहने वाले थे देवीपद चैधरी।
-अपने छः साथियों के साथ तिरंगा फहराने के लिए बढ़ने लगे सचिवालय की ओर।
-पुलिस के रोकने पर भी नहीं माने सातों।
-तिरंगा लेकर आगे बढ़ने वाले देवीपद पर पुलिस ने चलाई गोली।

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