भगवान कृष्ण को कंस से भी ज्यादा टेंशन दिया था इस बिहारी राजा ने, ‘रणछोड़’ नाम इसलिए पड़ा

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वैसे तो हम सभी लोग महाभारत की कहानियों और श्री कृष्ण की लीलाओं के बारे में सुनते और पढ़ते आये है। श्री कृष्ण को उनके भक्त कई नामों से पूजते हैं। शांत और कोमल चित वाले कान्हा की लीलाओं से कौन परिचित नहीं होगा?

भगवन के कई नामों से एक नाम “रणछोड़” भी है। जो बहुत सारे भक्तों के लिए रहस्य का विषय है। महाभारत जैसे युद्ध में सभी प्रतिकूल परस्थितियों के बाद भी पांडवों को विजय दिलाने वाले भगवान कृष्ण को जरासंघ से युद्ध करते समय रण छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा था।

दरअसल जब श्रीकृष्ण जरासंघ से युद्ध कर रहे थे तब उसका एक साथी कालयवन भी उनसे युद्ध करने आ गया था। कालयवन के पिछले जन्मों के बहुत अधिक पुण्य थे और भगवान तबतक किसी को सजा नहीं देते जबतक कि पुन्य का बल शेष हो। इसके वजह से ही श्रीकृष्ण को रण छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा था। इस तरह उनका नाम रणछोड़ पर गया।

ज्ञात हो कि जरासंघ महाभारत कालीन मगध राज्य का नरेश था। वह बहुत ही शक्तिशाली राजा था और उसका सपना चक्रवती सम्राट बनने का था। यद्यपि वह एक शक्तिशाली राजा तो था, लेकिन वह था बहुत क्रूर था। अपना सपना पूरा करने के लिए उसने बहुत से राजाओं को अपने कारागार में बंदी बनाकर रखा था। वह मथुरा के यदुवँशी नरेश कंस का ससुर एवं परम मित्र था उसकी दोनो पुत्रियो आसित एव्म प्रापित का विवाह कंस से हुआ था। श्रीकृष्ण से कंस वध का प्रतिशोध लेने के लिए उसने सत्रह बार मथुरा पर चढ़ाई की लेकिन हर बार उसे असफल होना पड़ा। जरासंध श्री कृष्ण का परम शत्रु और एक योद्धा था।

भीम के साथ जरासंघ का मल्लयुद्ध लगभग 28 दिनो तक चलता रहा लेकिन जितनी बार भीमसेन उसके दो टुकड़े करते वह फिर से जुड़ जाता। इस पर श्रीकृष्ण ने घास की एक डंडी की सहायता से भीम को संकेत किया की इस बार वह उसके टुकड़े कर के दोनों टुकड़े अलग-अलग दिशा में फेंके। तब भीम ने वैसा ही किया और इस प्रकार जरासंध का वध हुआ।