05, Dec, 2016
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रामधारी सिंह दिनकर के जन्मदिन पर खास रिपोर्ट… दिनकर के गांव से कब छंटेगा अंधेरा ?

Dinkar 1

दिनकर के गांव दिनकर की जन्म दिन पर खास रिपोर्ट
दिल्ली में तो है खूब ज्योति की चहल-पहल,
पर, भटक रहा है सारा देश अंधेरे में….

बिल्कुल सही पहचाना…ये पंक्तियां राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने ही लिखी थी। दिनकर की ये पंक्तियां आज के दौर में भी बिल्कुल चरितार्थ हो रही है। गांवों में रहने वाले लोगों के लिए दिल्ली की चमक-धमक आज भी एक ख्वाब के समान ही है। सरकार आंकड़ों और दावों की पोल खोलती तस्वीरें दिनकर के गांव सिमरिया की है। दिनकर का गांव साहित्यकारों के लिए किसी तीर्थस्थान से कम नहीं लेकिन इस गांव की तस्वीर और तकदीर को देखकर आज दिनकर को भी रोना आ रहा होगा। एक हल्की सी बारिश क्या हुई गांव मानो तालाब बन गया।

आपको ये जानकर हैरानी होगी की सिमरिया गांव का चयन प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सांसदों ने अपने क्षेत्र के एक गांव को आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित किया था। सिमरिया गांव बेगूसराय जिले में आता है और यहां के बीजेपी सांसद भोला सिंह ने इस गांव को आदर्श ग्राम बनाने का वादा किया था। सिमरिया के लोगों की उम्मीदें जगी और लगा कि अब कम से कम इस गांव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। लेकिन उनकी उम्मीदें अब नाउम्मीद में बदल गई है। एक साल होने को आया लेकिन अब तक विकास के नाम पर खोखले वादे ही किए गए हैं।

हम आपको याद दिला दें कि दिनकर की कृति संस्कृति के चार अध्याय और परशुराम की प्रतीक्षा के 50 वर्ष पूरे होने पर पिछले साल मई महीने में दिल्ली में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शिरकत किया था।
सिमरिया के लोगों की शिकायत है कि दिनकर के नाम पर बड़े-बड़े कार्यक्रमों का आयोजन तो होता रहता है लेकिन दिनकर के गांव की सुध लेनेवाला कोई नहीं। सिमरिया की हर दीवार पर आपको दिनकर की पंक्तियां नजर आ जाएगी। गांववालों ने दिनकर की स्मृति को बचाने का हर संभव प्रयास किया है। गांव में ही उनके नाम पर पुस्तकालय भी है लेकिन सरकारी मदद के नाम पर कुछ खास नहीं मिल पा रहा है। उम्मीदें आज भी कायम है कि दिनकर के गांव का अंधकार भी एक दिन जरूर छंटेगा…

वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल दूर नहीं है;
थक कर बैठ गये क्या भाई मन्जिल दूर नहीं है।

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3 विचार साझा हुआ “रामधारी सिंह दिनकर के जन्मदिन पर खास रिपोर्ट… दिनकर के गांव से कब छंटेगा अंधेरा ?” पर

  1. कामेश्वर चंधरी June 1, 2016

    अपने रेलवे काय के दौरान ,मै ने दिनकर जी के गाव सिमरिया के पास गरहडा मे भंडार डिपो मे एक पुस्तकालय की नीव रखी दिनकर .जी के नाम, मगर बाद मे उसका नाक्ष बदल दिया गया। सिमरिया से उनके सहयोगी बहुत उत्साहित थेः

  2. राम पुनीत June 1, 2016

    दो साल में इस गांव का कायाकल्प हो जाना चाहिये।संसदों ओर केंद्र सरकार ओर राज्य सरकार को शमॅ करने चाहिए क्योंकि केंद्र सरकार के ससंद ने इस गांव को गोद लिया है मोदी जी के गोद लिए हुए गांव कितना बड़ा विकास की हैं।ओर राज्य सरकार द्वारा घोषणा ही नही दावा किया जाता हैं कि बिहार में बहार हो ओर है वैसे राज्य सरकार की कथनी ओर करनी मे आकाश ओर पाताल का फकॅ हैं बिहारी लाल को उल ्लु बनाने वाले ये नई बात नहीं है ए गरीबी तो दो तीन दशक में बिहार की पहचान बनाई गईं हैं

  3. राम पुनीत June 1, 2016

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