वाचस्पति स्मृति भवन और मूर्ति अपने उद्घारक की अंतहीन प्रतीक्षा में…

Andrathadi
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भामती की तरह ही वाचस्पति स्मृति भवन और वहां रखी वाचस्पति की मूर्ति अपने उद्घारक की अंतहीन प्रतीक्षा में है। वाचस्पति स्मृति भवन सात वर्षो से लोकार्पण की प्रतीक्षा में ही है। अब इसे बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की अनदेखी कहे तो अनुचित नही होगा। वर्ष 2011-12 में कला संस्कृति विभाग ने स्मृति भवन निर्माण के लिए राशि उपलब्ध करायी थी। तत्कालीन सभापति पं स्व ताराकांत झा, पर्यटन मंत्री सुनील कुमार पिंटू और कला-संस्कृति मंत्री सुखदा पांडे ने इसकी आधारशिला रखी थी।

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वाचस्पति स्मृति भवन समय से तैयार भी हो गया। उस समय स्मृति भवन के अलावे ऐतिहासिक मिश्राइन पोखर में घाट निर्माण आदि योजनाओ की भी स्वीकृति दी गयी थी। स्मृति भवन परिसर में वाचस्पति की मूर्ति का भी अनावरण होना है। हालांकि उपेक्षा और रखरखाव के अभाव में स्मृति भवन कांति विहीन हो चुका है। सोलर स्ट्रीट लाइट का सोलर प्लेट भी वर्षो पूर्व चोरी हो चुका है। पोखर का घाट भी पूरी तरह टूट फूट चुका है। निर्माण स्मृति भवन में सभी आधुनिकतम सुविधा मुहैया कराने की बात सरकार और सबंधित अधिकारियों द्वारा कही गयी थी। मगर न तो स्मृति भवन का उदघाटन हुआ और न कोई आधुनिकतम सुविधा ही मिल सकी। 

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भामती-स्मृति स्मारक निर्माण समिति द्वारा स्थल के विकास के लिए पिछले दो साल से भामती-वाचस्पति स्मृति पर्व समारोह का आयोजन किया जाता है। ताकि शासन प्रशासन की नजर इस ओर पड़े।  इसी का परिणाम है कि मधुबनी जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक ने स्मृति पर्व समारोह को राजकीय पर्व समारोह घोषित करने के लिए कला-संस्कृति मंत्रालय बिहार को पत्र लिखकर आग्रह किया है। लोगों को उम्मीद है जिलाधिकारी की पहल सरकार और संस्कृति विभाग की कुंभकर्णी नींद को तोड़ने में सफल होगी और इस ऐतिहासिक स्थल का गौरव पुनर्स्थापित होगा।

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