लालबहादुर शास्त्री के 10 अनमोल विचार जिसे हर भारतीय को आत्मसात करना चाहिए

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आज ही के दिन 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी के साथ-साथ भारत के एक और महान सपूत लालबहादुर शास्त्री का भी जन्म हुआ था। गांधी जयंती तो हम पुरे देश में सरकारी और निजी स्तर पर भी पुरे सम्मान और जोर-शोर से मनाते हैं लेकिन सादगी, इमानदरी और देशभक्ति के प्रतिमूर्ति लालबहादुर शस्त्री जी को वो सम्मान नहीं दे पाते हैं जो उन्हें मिलना चाहिए। वो 18 महीने तक देश के प्रधानमंत्री थे। उन्हें मरणोपरां देश का सर्वोच्य सम्मान भारत रत्न से सम्मानित भी किया गया। जवान(सैनिक) और किसान की महता को समझते हुए ‘जय जवान, जय किसान’ कालजयी नारा उन्होंने ही दिया था।

आइए जानते हैं उनके 10 अनमोल विचार को

1: “जय जवान, जय किसान। – लाल बहादुर शास्त्री”

2: “जब स्वतंत्रता और अखंडता खतरे में हो, तो पूरी शक्ति से उस चुनौती का मुकाबला करना ही एकमात्र कर्त्तव्य होता है, हमें एक साथ मिलकर किसी भी प्रकार के अपेक्षित बलिदान के लिए दृढ़तापूर्वक तत्पर रहना है।” ~ लाल बहादुर शास्त्री

3: “क़ानून का सम्‍मान किया जाना चाहिए ताकि हमारे लोकतंत्र की बुनियादी संरचना बरकरार रहे और, और भी मजबूत बने।” – लाल बहादुर शास्त्री

4: “यदि कोई एक व्‍यक्ति भी ऐसा रह गया जिसे किसी रूप में अछूत कहा जाए तो भारत को अपना सर शर्म से झुकाना पड़ेगा।” – लाल बहादुर शास्त्री

5: “जो शासन करते हैं उन्‍हें देखना चाहिए कि लोग प्रशासन पर किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं। अंतत: जनता ही मुखिया होती है।” – लाल बहादुर शास्त्री

6: “देश के प्रति निष्‍ठा सभी निष्‍ठाओं से पहले आती है और यह पूर्ण निष्‍ठा है क्‍योंकि इसमें कोई प्रतीक्षा नहीं कर सकता कि बदले में उसे क्‍या मिलता है।” – लाल बहादुर शास्त्री

7: “यदि लगातार झगड़े होते रहेंगे तथा शत्रुता होती रहेगी तो हमारी जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। परस्पर लड़ने की बजाय हमें गरीबी, बीमारी और अज्ञानता से लड़ना चाहिए। दोनों देशों की आम जनता की समस्याएं, आशाएं और आकांक्षाएं एक समान हैं। उन्हें लड़ाई-झगड़ा और गोला-बारूद नहीं, बल्कि रोटी, कपड़ा और मकान की आवश्यकता है।” – लाल बहादुर शास्त्री

8: “आर्थिक मुद्दे हमारे लिए सबसे जरूरी है, जिससे हम अपने सबसे बड़े दुश्‍मन गरीबी और बेराजगारी से लड़ सके।” – लाल बहादुर शास्त्री

9: “लोगो को सच्‍चा लोकतंत्र और स्‍वराज कभी भी हिंसा और असत्‍य से प्राप्‍त नहीं हो सकता।” – लाल बहादुर शास्त्री

10: “जैसा मैं दिखता हूँ उतना साधारण मैं हूँ नहीं।” – लाल बहादुर शास्त्री