शिक्षक दिवस की पुर्व संध्या पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कही गयी कुछ अनसुनी बातें !

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बरुण ठाकुर की रिपोर्ट –

दरभंगा में , शिक्षक दिवस की पुर्व संध्या पर “द सॉल्यूशन ऑफ मैथमेटिक्स” द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि एसएसपी मनोज कुमार ने कहा कि हम अपने जीवन के लिए माता-पिता के ऋणी होते है लेकिन एक अच्छे व्यक्तित्व के लिए हम शिक्षक के ऋणी होते है. हर किसी की सफलता की नींव में एक शिक्षक की भूमिका अवश्य होती है बिना प्रेरणा के किसी भी ऊचांई तक पहुँचना असम्भव है एक छात्रों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने बताया कि “अनुशासन ही व्यक्ति के जीवन और उपलब्धि के बीच का सेतु है” सभागृह में छात्रों के उत्कृष्ट अनुशासन के लिए उन्होंने द सोलयूशन ऑफ मैथेमेटिक्स के निदेशक एम के पाठक को धन्यवाद दिया!

teachers day

डब्लू.आई.टी. के पूर्व निदेशक डॉ. लाल मोहन झा ने कहा कि जन्मदाता से ज्यादा महत्व शिक्षक का होता है क्योंकि ज्ञान ही व्यक्ति को इंसान बनाता है, जीने योग्य जीवन देता है
वहीं पूर्व डीन डॉ बी.के.सिंह ने बताया कि चीर अंधकार से भी एक शिक्षक ही बाहर निकाल सकता है
अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. अरुणिमा सिन्हा का मानना है कि किसी शिष्य को उसके वास्तविक गुणों एवं अवगुणों से उसका परिचय करवाना ही एक सच्चे शिक्षक का परिचय है
आई.बी.स्मृति के डॉ मृदुल शुक्ला ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र का निर्माण करते है जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए शिक्षक अतिआवश्यक है ।
प्रो. पुनीता झा ने कहा कि आधुनिक परिवेश में शिक्षक की जिम्मेदारियां बढ़ी है, शिक्षक का अपने मूल काम में मनोबल बना रहे इसके लिए शिक्षक दिवस मनाना जरुरी है
इससे पहले कार्यक्रम का उदघाटन वरीय पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार, डब्लू आई टी के पूर्व निदेशक डॉ लाल मोहन झा, पूर्व डीन डॉ बी.के.सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. अरुणिमा सिन्हा, प्रो. पुनीता झा,प्रो.प्रतिभा गुप्ता, डॉ अनिल कुमार झा, डॉ मृदुल शुक्ला,निदेशक एम. के.पाठक इत्यादि लोगों ने सामुहिक दीप प्रज्वलन कर सांस्कृतिक कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया । अतिथियों का स्वागत कुमारी सपना ने स्वागत गान से किया ।

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अपने स्वागत भाषण में संस्थान के निदेशक एम. के. पाठक ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक परिवेश में उपलब्ध संचार के अकूत संसाधन के बावजूद भी शिक्षकों की भूमिका को झुठलाया नहीं जा सकता है, तकनीकी कितना भी उन्नत क्यों ना हो जाए शिक्षक के मार्गदर्शन की आवश्यकता सतत बनी रही है और बनी रहेगी ऐसा इसलिए क्योंकि शिक्षक ना केवल किताबी बातों की ही व्याख्या करते है अपितु अपने ज्ञान, विद्वता, अनुभव, से एक अप्रतीम, अद्वितीय, अपरिमेय ऊर्जा का संचार करते है जो किसी मूर्त को जागृत कर देता है, एक निरीह को राजा बना देता है
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत सृष्टि फाउंडेशन के स्वर्णिम उपाध्याय और कोमल मांझी ने माता दुर्गा के जटा जुट की नृत्य के मनमोहक प्रस्तुति से हुई गोलमाल के गाने पर सपना पाण्डेय और स्नेहा ने तो राधा नाचेगी के गाने पर काब्या, संस्कृति, कामया, दीपमाला, खुशी, त्रिशा, विध्या, श्रुति, सृष्टि ने दर्शकों को भाव- विभोर कर दिया देर शाम तक एक से एक प्रस्तुति पर लोग झूमते रहे ।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद संस्थान के द्वारा बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए बच्चों को सर्टिफिकेट और मॉडल के साथ सौ से अधिक बच्चों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का मंच संचालन फहीम एवं अरुण कुमार मंडल ने किया धन्यवाद ज्ञापन करते हुए जय प्रकाश पाठक ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अथितियों के साथ साथ पुरे टीम के प्रति अपना आभार व्यक्त किया ।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान से किया गया।