मुजफ्फरपुर अल्पवास गृह रेप कांड: FIR के बाद भी सरकार ने NGO को दिया नया प्रोजेक्ट

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बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह में हुए यौन शोषण मामले को लेकर रोज कोई न कोई नया खुलासा हो रहा है। 29 बच्चियों के रेप होने की पुष्टि के बाद प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। इस कड़ी में एक नई जानकारी सामने आ रही है कि ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ के खिलाफ मिली शिकायत के बाद भी उसके संस्था को नया प्रोजेक्ट दिया गया।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की अप्रैल में आई रिपोर्ट में इस पूरे मामले का खुलासा हुआ था, लेकिन इसके ठीक एक महीने के बाद बिहार के सामाजिक कल्याण विभाग ने उसी एनजीओ को नया प्रोजेक्ट दे दिया था। यहां एक और हैरान करने वाली बात यह है कि ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ के खिलाफ जिस दिन एफआईआर दर्ज की, उसी दिन उसे नए प्रोजेक्ट का जिम्मा दिया गया। हालांकि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में यौन शोषण से जुड़े इस एफआईआर में ब्रजेश ठाकुर सहित 11 लोगों का नाम आने और फिर विभिन्न आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद विभाग ने इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया।

विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की तरफ से ठाकुर को पांच अल्पावास गृहों के संचालन के लिए एक करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता था। वहीं बच्चियों से बलात्कार के मामले में घिरे अल्पावास गृह को सालाना 35 लाख रुपये का अनुदान मिलता था। इसके अलावा ठाकुर को वृद्ध गृह के लिए 15 लाख मिलते थे। ठाकुर का परिवार तीन अखबार भी निकालता था, जिसमें प्रात: कमल, हिन्दी अखबार, हालात-ए-बिहार उर्दू दैनिक और न्यूज नेक्स्ट अंग्रेजी दैनिक शामिल है।

गौरतलब है कि यहाँ रहने वाली 42 लड़कियों की जब पटना के PMCH में मेडिकल जांच की गई तो उस समय 29 बच्चियों की रेप की बात कही जा रही थी। लेकिन अब मुजफ्फरपुर के एसएसपी हरप्रीत कौर ने कहा है कि 29 नहीं, बल्कि 34 बच्चियों के साथ रेप हुआ था।