महागठबंधन में रार, तेजस्वी कैसे पाएंगे इससे पार !

Advertisement

सवर्ण आरक्षण का मुद्दा महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा सकती है। एससी/एसटी एक्ट के संशोधन के विरोध में सवर्णों के भारत बंद के बाद बिहार की लगभग सभी पार्टियां गरीब सवर्णों को आरक्षण मिले इसकी वकालत करते नज़र आ रहे हैं। वहीं इस मुद्दे पर महागठबंधन के दो बड़े नेता जीतन राम मांझी और उदय नारायण चौधरी सुर अलग-अलग नजर आ रहा है। आपको बता दें कि ये दोनों नेता अनुसूचित जाति से आते हैं।

पूर्व सीएम जीतन राम मांझी कहते रहते हैं कि उनकी पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) की स्थापना काल से ही गरीब सवर्णों के आरक्षण के वे हिमायती रही है और उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार को सबसे पहले जातिगत जनगणना के आकड़े जारी करने की मांग की। उस आंक़ड़े के आधार पर संविधान संसोधन करते हुए लोहिया के विचार के अुनसार हरेक समाज के आबादी के अनुसार भागीदारी देने की व्यवस्था करने की मांग की।

वहीं मांझी के गरीब स्वर्ण के लिए आरक्षण की मांग का कड़ा विरोध करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने कहा है कि 15 फीसदी आरक्षण मांगने वाले को बहुजन समाज सबक सिखाएगी। उन्होंने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने संविधान में सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर कमजोर लोगों को लिए आरक्षण की व्यवस्था की है न कि आर्थिक आधार पर।

अब देखना ये है कि तेजस्वी यादव इन दोनों नेताओं के बीच कैसे सामंजस्य स्थापति करवाते हैं। चुनाव से पहले दो बड़े नेताओं के बयान में इस तरह का विरोधाभास महागठबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है।