’नेशनल डॉक्टर डे’ , मनाने के पीछे का कारण जान बिहारी होने पर करेंगे गर्व, जानिए क्यो मनाते हैं

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पटना। डाॅक्टर धरती पर भगवान का दूसरा रुप माना जाता है। विश्वभर में डाॅक्टर्स डे को लेकर अलग-अलग दिनो पर संलिब्रेशन किए जाते हैं और डाॅक्टरो को समाज में उनके अतुल्य योंगदान के लिए सराहा जाता है। जुलाई के पहले दिन हीं भारत अपने डाॅक्टर्स के योंगदान को सराहने के लिए ’डाॅक्टर डे’ सेलिब्रेट किया जाता है।

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लेकिन आज हम आपके लिए इस डाॅक्टर डे पर कुछ खास लेकर आए है। ये तो सब जानते है कि किसी भी खास दिन को मनाने के पीछे कोई न कोई कारण होता है। डाॅक्टर्स डे डाॅक्टर्स के लिए खास तो है ही लेकिन आपको बता दे कि भारत के नेशनल डाॅक्टर्स डे मनाने की एक बड़ी और अहम कड़ी हमारे बिहार से भी जुड़ी है। जी हां, वो बिहार की ही धरती थी जिसने उस पुत को जना जिनके योंगदान को सम्मान देने कि लिए पूरा भारत 1 जुलाई को डाॅक्टर्स डे मनाता है।

पटना के रहनेवाले इस लाल के जन्म दिन के मौके पर ही ये खास दिन सेंलिब्रेट किया जाता है। इस दिन इस बिहारी लाल का सिर्फ जन्मदिवस ही नहीं बल्कि उनकी पुण्यतिथि भी है। ये लाल है डॉ. विधानचंद्र रॉय। आपको बता दे कि डाॅ विद्यानचंद्र राय प. बंगाल के द्वितीय मुख्यमंत्री भी रहे थे। उनका जन्म पटना के खजांची रोड में हुआ था।

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बिधान चन्द्र रॉय का जीवन परिचय:- पं. बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री रहे महान फिजिशियन डॉ. बिधान चंद्र रॉय को दुनिया उनके दूरदर्शी नेतृत्व के लिए लिए जानती है। शायद यही कारण है कि उन्हे पं. बंगाल राज्य का आर्किटेक्ट भी कहा जाता हैं। 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना में जन्में रॉय ने अपनी डॉक्टरी की डिग्री कलकत्ता से पूरी की थी। इससे पहले वे पटना विश्वविद्यालय के छात्र रहे जहां से उन्होने गणित में स्नातक किया और 1901 में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया।

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कलकत्ता से एमडी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड निकल गए। वहां एमआरसीपी और एफआरसीएस की परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं। इसके राॅय देश लौट आए और बंगाल के सियालदह में अपना क्लीनिक खोला। इसके साथ ही उन्होने सरकारी नौकरी भी की। इसी दौरान राॅय कांग्रेसी नेताओं के संपर्क में आए। चित्तरंजन दास, सुभाषचंद्र बोस आदि से उनकी नजदीकियां काफि बढ़ीं। वे 1909 में रॉयल सोसाइटी ऑफ मेडिसिन, 1925 में रॉयल सोसायटी ऑफ ट्रॉपिककल मेडिसिन और 1940 में अमरीकन सोसाइटी ऑफ चेस्ट फिजिशियन के फेलो चुने गए।

सवौच्चय नरगरिक सम्मान ’भारत रत्न से नवाजा गया:- एक चिकित्सक के रूप में अपने करियर की शुरूआत करनेवाले बिधान चंद्र कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में शिक्षक भी रहे। बाद में वो भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के नेता बने और उसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री। उन्हे उनके योंगदान के लिए 4 फरवरी 1961 को सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया। कलकत्ता और इलाहाबाद विश्वविद्यालयों ने उन्हें डीएससी की उपाधि दी। कलकत्ता के दो बार मेयर रहे।

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विधानचंद्रचंद्र जी का योंगदान अजादी के आंदोलन में भी रहा। आजादी की लड़ाई के दौरान वे दो बार जेल गए। वही जब देश अजाद हुआ तो उन्हे उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया। लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया। इसके बाद वे प. बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री बने और फिर 1948 में मुख्यमंत्री। अपनी अतिम सांस तक वे इस पद पर बने रहे । 1961 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

इस दुनिया में अपनी महान सेवा देने के बाद 80 वर्ष की आयु में 1962 में अपने जन्मदिवस के दिन ही उनकी मृत्यु हो गयी।

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