अब प्यार पर नहीं मंडराएगा आॅनर किलिंग का खतरा, सेफ हाउस में सेफ रहेंगे युगल

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पटना। बिहार मे ंअब प्रेमी युगलो को किसी का डर नहीं रहेंगा।क्यो कि अब सरकार उन्हे खुद सुरक्षा मुहैया कराएगी। जीं हां बिहार में अब प्रेम और विवाह के बाद परिवार और समाज के भय से प्रेमी युगलों को मारे मारे फिरने की जरुरत नहीं होंगी। बहुत जल्द राज्य सरकार इन्हें आॅनर किलिंग और सामाजिक प्रताड़ना से बचाने को लेकर सेफ हाउस (सुरक्षित भवन) की नीव रखने जा रही है।

बता दे कि ऐसे प्रेमी युगलो को जिनके उपर जान का खतरा मेंडरा रहा है वे इस सेफ हाउस में एक साल तक रह सकेंगे। बता दे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार ने यह संकल्प जारी किया है। अविवाहित और नवविवाहित युगल सेफ हाउस में एक वर्ष तक सस्ती दरो पर रह सकेंगे। बता दे कि सेफ हाउस में रहनेवाले प्रेमी युगलो को कोई दिक्कत न हो इसके लिए इनकी निगरानी सीधे डीएम और एसपी जरिए होंगी। अगर प्रेमी युगल यदि वयस्क हैं तो प्रशासन दोनों की शादी के लिए आवश्यक सहयोग भी करेंगे।

सेफ हाउस के संचालन में हर माह 10-15 लाख होंगे खर्च

प्रेमी युगलों को सुरक्षित आश्रय देने को लेकर सरकार ने यह कदम उठाया है। सरकार के इस योंजना के अनुसार कइ्र जगहो पर सेफ हाउस की स्थापना की जाएगी। एक सेफ हाउस की स्थापना पर लाखों रुपये सरकार करेंगी। बता दे कि बिहार के सभी 38 जिला हैं और नौ प्रमंडलों मे ये सेफ हाउस बनेंगे। प्रत्येक प्रमंडल एक सेफ हाउस भी खोला गया तो नौ सेफ हाउस की स्थापना पर ही करीब नौ करोड़ों रुपये सलाना खर्च होंगे। इनके संचालन और सुरक्षा पर भी हर माह 10-15 लाख रुपये खर्च करने होंगे।

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बिहार में लगातार बढ़ रहे आॅनर किलिंग के मामले

बता दे कि बिहार में इन दिनो आॅनर किलिंग के मामले बड़ी तेजरत्री से लगातार बढ़ रहे हैं। पीछले महीने भी कई सारे ऐसे मामले सामने आ गए है जिनमें प्रेमी युगलो ने अपने परिवार के विरूद्ध जाकर शादी करने का अंजाम अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।

प्यार में घर छोड़ने की घटनाओं में 22 गुनी वृद्धि

बता दे कि साूबे में ऐसे प्रेमी युगलो की भी संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है जो अपना घर छोड़ फरार हो जाते हैं। ऐसी घटनाओ में ं 22 गुनी वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 में 112 घटनाएं हुईं थीं. 2012 में यह आंकड़ा बढ़कर 402 हो गया. 2015 में 1229 और 2017 में 2539 महिलाओं ने घर छोड़ दिया. इनमें से अधिकतरों को मुसीबतों का सामना करना पड़ा।

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