बुलेट ट्रेन: पीएम मोदी के सपने को साकार करेगा यह बिहारी, पढ़ें पूरी खबर

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वरुण कुमार ठाकुर की रिपोर्ट

बिहार के लाल ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा के दम पर बिहार का नाम रोशन किया है। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन परियोजना को रफ्तार देने के लिए बिहार के दरभंगा जिले के महिनाम गॉव निवासी नर्मदेश्वर झा का चयन किया गया है। इसके लिए वे जापान में विधिवत ट्रेनिंग ले रहे हैं। नर्मदेश्वर कहते हैं कि देश में बुलेट ट्रेन को रफ्तार देने का वह भरसक प्रयास करेंगे। अभी वे हाई स्पीड ट्रेन संचालन करने वाली टीम के सदस्य हैं और जपान दौरा पर गए हुए हैं।

नर्मदेश्वर की माने तो अच्छे काम करने का ही नतीजा है कि मुझे मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन के परिचालन को लेकर विशेष ट्रेनिंग के लिये चुना गया है। पंद्रह दिनों की ट्रेनिंग जापान के टोक्यो और नागासाकी में हो रही है। यह ट्रेनिंग भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़ी जापानी कंपनी द्वारा दी जाएगी। मेरी कोशिश रहेगी कि देश को इस नई सुविधा का फायदा मिले। बिहार में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। अवसर मिलते ही वे अपने प्रदेश का नाम देश-विदेश में रौशन कर रहे हैं।

दरभंगा जिले के महिनाम गांव का रहने वाले नर्मदेश्वर झा की मैट्रिक तक की शिक्षा गांव के स्कूल में ही हुई। पिता डॉ। ललितेश्वर झा, मझौल बेगूसराय के कॉलेज में संस्कृत के प्राध्यापक थे। उसी कॉलेज से उन्होंने इंटर की परीक्षा अच्छे अंको से पास हुए। घरवालों के कहने पर बिहार इंजीनियरिंग की परीक्षा की तैयारी किया और सफलता भी मिली। जिसके फलस्वरूप एमआईटी मुजफ्फरपुर में उनका नामांकन हुआ। बीटेक करने के बाद आगे अध्ययन के लिए आईआईटी कानपुर में आवेदन दिए और एमटेक के लिये चुन लिए गए।

पिता चाहते थे आईएएस बने

एमटेक करने के बाद इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस के लिये तैयारी शुरू कियाअच्छी मेहनत के नतीजा से वर्ष 2002 में आईईएस सर्विस में चयन हो गया। घर में खुशी की लहर दौड़ गयी। सेंट्रल वाटर कमीशन में सीनियर अभियंता के पद पर नियुक्ति हुई। दिल्ली में ही पोस्टिंग हुई। आईईएस में सेलेक्ट होने के बाद भी मन को तसल्ली नहीं हो पा रही थी। सोचता था कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाकर क्यों न आम लोगों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास करूं। पिताजी की भी ख्वाहिश थी कि बेटा आईएएस बने। उनकी इस ख्वाहिश को पूरी करने के लिये उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी। दिनभर ऑफिस का काम और रात भर आईएएस तैयारी इसी को उन्होंने अपना दिनचर्या बना लिया। मेंहनत रंग लाई साल 2006 में सिविल सविॅसेज की परीक्षाओं में सफलता मिली। लेकिन कम रैंक होने के कारण इंडियन रेलवे ट्रेफिक सविॅस में चयन हुआ।

नर्मदेश्वर कहते हैं मन में एक उलझन सी हो गई थी । यह काम करूँ या पहले से जो कर रहा हूँ वो करूं, लेकिन मेरी पत्नी ने मेर‍ा साथ दिया। मेरी पत्नी डॉ प्रतिभा झा भी नोएडा में एक मैंनेजमेंट कोलेज में प्रोफेसर थी मेरे रेलवे में आने के कारण उन्हें अपना नौकरी छोडना पड़ा । श्री झा इन दिनों मुंबई में सेंट्रल रेलवे में सीनियर डीआएम के पद पर कार्यरत है उनकी दो बेटीयां हैं जो मुंबई में पढ़ाई करती है।