भाजपा-जदयू आलाकमान का फरमान, बड़बोलेपन और बेवजह की बयानबाजी न करें प्रवक्ता

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पटना। 2019 चुनाव को लेकर बिहार की एमडीए के दो घट दलो जदयू और बीजेपी के नेताओ के बीच बयान बाजी ेज है। एक ओर जहां जदयू 2019 के चुनाव में नीतीश को चेहरा बता रहीं तो शीट शेयरिंग के मुद्दे पर भी दोनो में बात नहंी बन रहीं है। लेकिन जदयू के रविवार को ये कहने के बाद की जदयू 2019 का चुनाव एडीए में रहकर ही लड़ेंगा, दोनो पार्टियो ने अपने नेताओ के बयानबाजी को लेकर कड़ा कदम उठाया हैं।

आलाकमान ने भाजपा और जदयू के प्रवक्ताओं की जुबान को बंद रखने का निर्देश दिया है। पिछले कुछ दिनों से चल रही बयानबाजी पर रोक लगाने के लिए ये निर्देश जारी किया गया है कि कोई भी प्रवक्ता बेवजह की बयानबाजी नहीं करेगा। एसे कयास लग रहें हैं कि 12 जुलाई को अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच मुलाकात को लेकर ये फरमान जारी किया गया है।

वहीं एनडीए की ओर से जारी इस फरमान को लेकर विपक्षी पार्टियो ने तंज कसा है। राजद के नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि ये लोग तुगलकी फरमान जारी करने में उस्ताद है। इन लोगों ने देश में बिहार में इमर्जेंसी की हालत में पहुंचा दिया है। अब प्रवक्ताओं के लिए तुगलकी फरमान जारी किया गया है अब उन्हें मुंह बंद रखना पड़ेगा। दरअसल ये लोग डरे हुए हैं और नीतीश कुमार तो भाजपा के पेंच में फंसे हुए हैं, क्या करेंगे बेचारे?

वहीं भाई विरेंन्द्र के बयान पर बोलते हुए बीजेंपी नेता संजय टाइगर ने कहा कि हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है। सीटों के तालमेल को लेकर जो विपक्षी लोग कयास लगा रहे हैं ऐसा कुछ होने वाला नहीं है। सीट शेयरिंग का मुद्दा हम सुलझा लेंगे। बेवजह की बयानबाजी तो नहीं ही होनी चाहिए जब सबकुछ ठीक है तो।

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इसपर जदयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि बयानबाजी अपनी जगह है, सीट शेयरिंग का मुद्दा हम मिल बैठकर सुलझा लेंगे। प्रवक्ता जो भी बोलते हैं लेकिन फैसला तो आलाकमान ही करती है। हमारे बीच सबकुछ ठीक है।बता दें कि सीट शेयरिंग को लेकर दोनों पार्टियों के बीच प्रवक्ताओं के तीखे बयान सामने आए थे।

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